जागरण संवाददाता, रांची : सामाजिक न्याय, संविधान का आधार स्तंभ है। सामाजिक न्याय द्वारा ही देश के संविधान निर्माताओं द्वारा संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि जो आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक या लैंगिक रूप से पिछड़ गए लोग हैं वे बराबरी पर आ सकें, आगे निकल चुके समाज या व्यक्ति के साथ कदम से कदम मिला कर चल सकें। गुरुवार को निर्मला कॉलेज में दैनिक जागरण की ओर से सोशल जस्टिस पर आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने अपनी बात रखी। मुख्य अतिथि जैप-2 कमांडेंट संजय रंजन ने इस दिन को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि जब न्याय की बात होती है तो उसे सफलता से जोड़ कर देखा जाता है, ऐसे में सफल तथा असफल लोगों के बीच एक दीवार बन चुकी है, जिसे पाटने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सफलता की परिधि में ही समानता का बीज छुपा है। कोई समाज तभी सफल होगा, जब वहां समानता होगी। असमानता लिए हुए समाज हमेशा असफल ही होता है। असमानता की वजह से हालात होते हैं खराब : पांडेय रिटायर्ड जज प्रेम प्रकाश पांडेय ने कहा कि न्याय का जन्म परिवार से ही शुरू होता है। बेटी के जन्म लेने के बाद से ही उसके लिए विपरीत परिस्थितियां बननी शुरू हो जाती हैं। वर्तमान समय में न्याय का स्वरूप बिगड़ चुका है। समाज में फैले भेदभाव तथा असमानता की वजह से हालात इतने बुरे हो जाते हैं कि मानवाधिकार का हनन होने लगता है। अधिकारों का संरक्षण ही सामाजिक न्याय

प्रोफेसर डॉ सीमा सिंह ने कहा कि मानव के अधिकारों का संरक्षण ही सामाजिक न्याय है। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म, लिंग, स्थान, रंग, रूप आदि से भेदभाव के उन्मूलन से ही समाज में समानता आ सकती है। अपने अधिकारों के बारे में जानें : सईद

कराटे प्रशिक्षक सईद रहमान ने कहा कि अपने अधिकारों के बारे में जानने से ही सामाजिक न्याय कायम हो सकता है। यदि व्यक्ति शारीरिक तथा मानसिक तौर पर स्वस्थ रहे तो वह सामाजिक न्याय की आधी लड़ाई जीत लेता है।

Posted By: Jagran

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