विद्युत नियामक आयोगों में वॉचडॉग नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, झारखंड-मध्यप्रदेश सहित 15 राज्यों और J&K को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने एनर्जी वॉचडॉग की याचिका पर झारखंड समेत 15 राज्यों को विद्युत नियामक आयोगों में खाली पदों को ...और पढ़ें

विद्युत नियामक आयोगों में रिक्त पदों का मामला।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने 15 राज्यों को नोटिस जारी किया।
विद्युत नियामक आयोगों में खाली पदों का मामला।
एनर्जी वॉचडॉग ने जनहित याचिका दायर की।
राज्य ब्यूरो, रांची। सुप्रीम कोर्ट ने एनर्जी वॉचडॉग की जनहित याचिका सुनवाई करते हुए झारखंड सहित 15 राज्यों को नोटिस जारी किया। यह याचिका झारखंड के राज्य बिजली नियामक आयोगों में लंबे समय से खाली पड़े पदों और कानूनी रूप से योग्य सदस्यों की कमी के बारे में है।
चीफ जस्टिस आफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जायमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच में सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया कि लंबे समय से खाली पड़े पद संविधान के अनुच्छेद 21, बिजली अधिनियम, 2003 मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले का उल्लंघन हैं।
एनर्जी वॉचडॉग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें 15 राज्य सरकारों व जम्मू-कश्मीर को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में जिन राज्यों को प्रतिवादी बनाया गया है, उनमें झारखंड, बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरलम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर का नाम शामिल है।
याचिका में कहा गया कि इन राज्यों में विद्युत नियामक आयोग के अनेकों पद लंबे समय से खाली है। इससे उपभोक्ताओं को न्याय नहीं मिल पा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कई राज्यों में आयोग के निर्धारित पद भी स्वीकृत नहीं है।
झारखंड सहित कई राज्यों में स्वीकृत पद आंशिक रूप से भरे हैं। झारखंड की बात करें तो राज्य में नियामक आयोग के चेयरमैन की नियुक्ति की गई है। अदालत ने सुनवाई के बाद प्रतिवादी बनाए गए सभी राज्यों के नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
