रांची, जासं । झारखंड की राजधानी रांची में हुए सचिन वर्मा की मॉब लिंचिंग का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दिल्ली के पास पहुंच गया है। इस मामले में आयोग ने रांची डीसी व एसएसपी को एक पत्र भेजकर इस मामले से जुड़े 14 अलग-अलग बिंदुओं पर जवाब मांगा है। साथ ही आठ सप्ताह यानि दो महीने के भीतर इसकी रिपोर्ट जमा करने को कहा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के लॉ डिविजन की ओर से मांगे गए रिपोर्ट में सचिन वर्मा की मौत की असली वजह, सचिन की कब और कहां से गिरफ्तारी की गई। साथ ही उसकी गिरफ्तारी के कारण का स्पष्ट जवाब मांगा गया है। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किस प्रकार की इंजूरी पाई गई व उसके गिरफ्तारी की परिजनों को जानकारी थी या नहीं सहित कई सवाल पूछे गए हैं।

8 मार्च की रात ट्रक चोरी के आरोप में की थी पिटाई

8 मार्च की रात अपर बाजार के स्थानीय मोटिया मजदूर ने 22 साल के सचिन कुमार वर्मा की बेदर्दी की पिटाई की थी। उसे पीट-पीट कर अधमरा कर दिया था। इतना ही नहीं उसके पूरे शरीर में गर्म लोहे के रॉड से भी दागा था। पुलिस उसे भीड़ से बचाकर कोतवाली थाना लाई थी। जहां 9 मार्च को उसकी मौत हो गई थी। सचिन नवाटोली भुताहा तालाब के पास का रहने वाला था। परिवार के दबाव पर 40 लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है।

इंजूरी की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी

आयोग ने इस मामले में इंजूरी की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की पूरी वीडियो फुटेज जमा करने को कहा है। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट को टेक्स फॉर्मेट में भी मांगा गया है। इसमें खासकर यह पूछा गया है कि इसमें किसी प्रकार की इंजूरी की बात सामने आई थी। उन सभी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हाइलाइट कर के जमा करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही एफएसएल रिपोर्ट के मुताबिक मौत के मुख्य कारणओं की भी जानकारी मांगी गई है।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप