राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संरचना में बड़ा बदलाव, स्वयंसेवकों की संख्या दोगुनी हो जाएगी; इंदौर बैठक में लगेगी मुहर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी संगठनात्मक और भौगोलिक संरचना में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। इंदौर में 2 नवंबर ...और पढ़ें

इंदौर में दो नवंबर से प्रस्तावित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में बनेगी सहमति।
HighLights
आरएसएस की संगठनात्मक और भौगोलिक संरचना में बड़े बदलाव प्रस्तावित।
इंदौर में 2 नवंबर से अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक।
जिलों और स्वयंसेवकों की संख्या दोगुनी करने पर सहमति बनेगी।
संजय कुमार, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की संगठनात्मक और भौगोलिक संरचना में बदलाव की तैयारी है। प्रांत की जगह संभाग की संरचना लागू करने के साथ विभाग, जिला, मंडल, नगर और बस्तियों की संख्या बढ़ाने की योजना है। सभी प्रांतों में इस पर काम लगभग पूरा हो चुका है। अधिकारों के विकेंद्रीकरण पर भी काम हो रहा है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में दो नवंबर से प्रस्तावित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में इन प्रस्तावों पर सहमति बनेगी। इसके तहत संघ कार्य की दृष्टि से जिलों की संख्या लगभग 924 से बढ़ाकर 1500 से 1600 के बीच करने की योजना है।
मंडलों और बस्तियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। नगरों और विभागों की संख्या भी काफी बढ़ जाएगी। इसके साथ ही दायित्वधारी स्वयंसेवकों की संख्या भी दोगुनी से अधिक हो जाएगी। पूरे देश में अभी इनकी संख्या पांच लाख के लगभग है।
इसका उद्देश्य देश के सभी मंडलों और बस्तियों तक संघ का कार्य पहुंचाना है। सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की यह राष्ट्रीय स्तर पर अंतिम बैठक होगी। अगले वर्ष से यह बैठक क्षेत्र के अनुसार होगी, जिसमें अखिल भारतीय अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।
प्रांत संघचालक से लेकर प्रचारक के रूप में यह अंतिम बैठक होगी
दो नवंबर से इंदौर के डेली कालेज परिसर में होने वाली तीन दिवसीय बैठक से पूर्व 29 अक्टूबर को छोटी टोली की बैठक होगी। उसके बाद 30 अक्टूबर को अखिल भारतीय अधिकारियों की बैठक होगी। वहीं, 31 अक्टूबर को सभी अखिल भारतीय अधिकारियों के साथ-साथ सभी क्षेत्र कार्यवाह और प्रचारक बैठक में उपस्थित रहेंगे।
एक नवंबर को प्रांत कार्यवाह और प्रचारक एवं उनके सहयोगी बैठक में शामिल होंगे। दो नवंबर से होने वाली बैठक में सभी क्षेत्र व प्रांतों के संघचालक और समवैचारिक संगठनों के अखिल भारतीय प्रमुख भी शामिल होंगे।
अखिल भारतीय स्तर पर होने वाली यह बैठक सभी प्रांत संघचालक, कार्यवाह और प्रचारकों के लिए भी अंतिम होगी। अगले वर्ष मार्च के बाद सभी पद समाप्त हो जाएंगे। नए पद के रूप में प्रदेश कार्यवाह और प्रचारक सामने आएंगे। फिर संभाग की पूरी कार्यकारिणी बनेगी।
