'रोज केरकेट्टा साहित्य सम्मान- 2026' के लिए देश भर की लेखिकाओं से आवेदन आमंत्रित, विजेता की घोषणा 27 नवंबर को
झारखंड में 'रोज केरकेट्टा साहित्य सम्मान 2026' के लिए महिला रचनाकारों से आवेदन मांगे गए हैं, जिसमें इस बार नियम ...और पढ़ें

रांची यूनिवर्सिटी के पंचपरगनिया विभाग में साहित्यकार राजकिशोर सिंह ‘बुंड़ूआर’ की जयंती मनाई गई।
HighLights
रोज केरकेट्टा साहित्य सम्मान 2026 के लिए आवेदन शुरू।
सम्मान के नियमों में बदलाव, सभी वर्गों की लेखिकाओं हेतु।
रांची विश्वविद्यालय में राजकिशोर सिंह बुंड़ूआर की जयंती मनाई गई।
जागरण संवाददाता रांची। झारखंड की कला, संस्कृति और साहित्य जगत से जुड़ी दो अहम खबरें सामने आई हैं। एक ओर जहां सुप्रसिद्ध शिक्षाविद और साहित्यकार रोज केरकेट्टा की स्मृति में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित 'रोज केरकेट्टा साहित्य सम्मान 2026' के लिए देशभर की महिला रचनाकारों से आवेदन मांगे गए हैं, वहीं दूसरी ओर रांची यूनिवर्सिटी में पंचपरगनिया के प्रख्यात साहित्यकार राजकिशोर सिंह ‘बुंड़ूआर’ की जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई।
देशभर की महिला रचनाकारों के लिए खुला 'रोज केरकेट्टा साहित्य सम्मान 2026
प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन द्वारा दिए जाने वाले इस राष्ट्रीय सम्मान के नियमों में इस बार अहम बदलाव किया गया है। अब यह सम्मान बारी-बारी से एक वर्ष आदिवासी और अगले वर्ष किसी भी भारतीय समुदाय की स्त्री रचनाकार को दिया जाएगा। इसी क्रम में वर्ष 2026 का यह सम्मान सभी वर्गों की लेखिकाओं के लिए खुला रहेगा।
- सम्मान राशि:25,000 रुपये
- योग्यता: लेखिका की उम्र 25 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- पुस्तक प्रकाशन की अवधि: पुस्तक 9 अगस्त 2024 से 20 सितंबर 2026 के बीच हिंदी में प्रकाशित होनी चाहिए (कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, जीवनी या अन्य साहित्यिक विधा)।
- आवेदन की अंतिम तिथि: 20 नवंबर 2026 (गूगल फॉर्म के माध्यम से आवेदन और पुस्तक की तीन प्रतियां भेजना अनिवार्य)।
- घोषणा और सम्मान समारोह: विजेता की घोषणा 27 नवंबर को होगी, और 7 दिसंबर 2026 को रोज केरकेट्टा की 86वीं जयंती पर रांची में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।
रांची यूनिवर्सिटी में मनाई गई राजकिशोर सिंह ‘बुंड़ूआर’ की जयंती
दूसरी ओर, रांची यूनिवर्सिटी के पंचपरगनिया विभाग में पंचपरगनिया भाषा और साहित्य के पुरोधा राजकिशोर सिंह ‘बुंड़ूआर’ की जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शिक्षकों और शोधार्थियों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंचपरगनिया एवं कुरमाली विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर मुंडा ने उनके जीवन और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस दौरान सहायक प्राध्यापक जयप्रकाश उरांव और डॉ. उपेंद्र कुमार ने भी उनकी साहित्यिक रचनाओं, गीत-संगीत और कला के क्षेत्र में किए गए कार्यों को रेखांकित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शोधार्थी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
