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RIMS की VIP स्वास्थ्य जांच योजना चार माह बाद भी अधर में, कम खर्च में होनी थी फुल बॉडी जांच

Published: Wed, 23 Sep 2026 02:30 PM (IST)

रांची के रिम्स में सस्ती वीआईपी स्वास्थ्य जांच योजना चार महीने बाद भी लागू नहीं हो पाई है, जिससे मरीजों ...और पढ़ें

निजी अस्पतालों से कम खर्च में होनी थी फुल बॉडी जांच।

निजी अस्पतालों से कम खर्च में होनी थी फुल बॉडी जांच।

HighLights

  1. रिम्स की वीआईपी स्वास्थ्य जांच योजना चार माह से लंबित।

  2. निजी अस्पतालों से कम खर्च में फुल बॉडी जांच का वादा।

  3. अब एनएबीएल मान्यता प्रक्रिया पूरी करने पर जोर।

जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में लोगों को एक ही छत के नीचे सस्ती दर पर विशेष स्वास्थ्य जांच उपलब्ध कराने की योजना चार माह बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। संस्थान की जनरल बाॅडी (जीबी) की बैठक में पेड स्पेशल हेल्थ चेकअप यानी वीआइपी जांच सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया गया था।

इसके तहत बेसिक हेल्थ चेकअप से लेकर जरूरत के अनुसार विशेष जांच और फुल बाॅडी चेकअप तक की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना थी। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। योजना लागू होने पर लोगों को निजी अस्पतालों और बड़े डायग्नोस्टिक सेंटरों की तुलना में कम खर्च में स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद थी।

मरीजों को अलग-अलग विभागों और जांच केंद्रों का चक्कर लगाने के बजाय एक निर्धारित स्थान पर पंजीयन, सैंपल कलेक्शन, जांच और चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने की तैयारी थी। इससे खासकर व्यस्त नौकरीपेशा लोगों, बुजुर्गों और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने वालों को सुविधा मिल सकती थी।

निर्णय हुआ, लेकिन आगे नहीं बढ़ी फाइल

इस योजना को पूर्व निदेशक के कार्यकाल में ही हरी झंडी मिली थी। इसके बाद जीबी स्तर पर भी निर्णय लिया गया, लेकिन योजना को लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं आगे नहीं बढ़ सकीं।

अधिकारियों के स्तर पर बदलाव और फाइलों के लंबित रहने के कारण योजना शुरू नहीं हो पाई। नतीजा यह रहा कि रिम्स में मौजूद जांच सुविधाओं के बावजूद एकीकृत हेल्थ चेकअप की व्यवस्था मरीजों को नहीं मिल सकी।

अब एनएबीएल मान्यता पर जोर

रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डा. हिरेंद्र बिरुआ ने बताया कि योजना शुरू करने से पहले कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम करना होगा। लंबे समय से इस दिशा में काम नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि किसी भी लैब को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से संचालित करने के लिए एनएबीएल के गुणवत्ता मानकों को पूरा करना महत्वपूर्ण है। अब इन प्रक्रियाओं को पूरा करने का प्रयास शुरू किया जाएगा। जीबी में लिए गए निर्णय को पूरा करने की दिशा में काम किया जाएगा।

क्या मिलता लाभ

वीआईपी हेल्थ चेकअप शुरू होने पर मरीज को सामान्य जांच के लिए रिम्स के अलग-अलग हिस्सों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। एक ही स्थान पर स्वास्थ्य जांच, रिपोर्ट और चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था की जा सकती है।

जांच के दौरान किसी बीमारी की आशंका मिलने पर संबंधित विशेषज्ञ से आगे की जांच और परामर्श भी उपलब्ध कराया जा सकता है। फुल बाडी चेकअप की सुविधा से मधुमेह, रक्तचाप, हृदय रोग, किडनी, लिवर समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती स्क्रीनिंग में मदद मिल सकती है।

हालांकि, हर व्यक्ति को बिना चिकित्सकीय जरूरत के सभी तरह के स्कैन कराना जरूरी नहीं होता। जरूरत के अनुसार जांच का चयन चिकित्सकीय सलाह से किया जाना अधिक उचित है।

निजी अस्पतालों की तुलना में कम खर्च का था दावा

योजना की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि रिम्स में यह सुविधा निजी संस्थानों की तुलना में कम खर्च में उपलब्ध कराने की तैयारी थी। मरीजों से जांच की वास्तविक लागत के आधार पर शुल्क लेने की बात कही गई थी। इससे निजी अस्पतालों में महंगे हेल्थ पैकेज का खर्च वहन करने में असमर्थ लोगों को भी व्यापक स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल सकती थी।

आम मरीजों के लिए भी उठेगा सवाल

रिम्स में पहले से पैथोलाजी और रेडियोलाजी की कई जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद मरीजों को जांच के अनुसार अलग-अलग विभागों और भवनों में जाना पड़ता है। प्रस्तावित वीआइपी जांच केंद्र का उद्देश्य इसी समस्या को एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से दूर करना था।

अब योजना के लंबित रहने के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि एक छत के नीचे जांच की व्यवस्था वीआइपी या पेड मरीजों के लिए विकसित की जा सकती है, तो सामान्य मरीजों के लिए भी ऐसी सुव्यवस्थित व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जाए।