RIMS की सुरक्षा से हटाए गए होमगार्ड के 400 जवान, इनमें ज्यादातर महिलाएं; पूर्व सैनिक संभालेंगे कमान
रिम्स रांची में सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा, जहां लगभग 400 होमगार्ड जवानों की जगह पूर्व सैनिकों (सैप जवानों) ...और पढ़ें

स्पताल में बार-बार मारपीट और हंगामे के बाद सुरक्षा व्यवस्था बदलेगी।
HighLights
रिम्स से हटेंगे 400 होमगार्ड जवान, पूर्व सैनिक लेंगे जगह।
अस्पताल में मारपीट, हंगामे के बाद सुरक्षा बदलाव का निर्णय।
नई व्यवस्था से अनुशासन, प्रभावी भीड़ नियंत्रण की उम्मीद।
जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। संस्थान में तैनात करीब 400 होमगार्ड जवानों को हटाकर उनकी जगह पूर्व सैनिकों को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी है।
इनमें बड़ी संख्या महिला होमगार्ड जवानों की बताई जा रही है। रिम्स की 66वीं शासी परिषद की बैठक में होमगार्ड के स्थान पर सैप जवानों की तैनाती का प्रस्ताव स्वीकृत किया जा चुका है। इसके तहत मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से बदला जाना है।
सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत के पीछे अस्पताल परिसर में बार-बार होने वाले हंगामे, मरीजों के परिजनों और चिकित्सकों के बीच मारपीट तथा संवेदनशील स्थानों पर भीड़ को नियंत्रित करने की चुनौती प्रमुख वजह मानी जा रही है।
रिम्स में इमरजेंसी और वार्डों में मरीजों के साथ बड़ी संख्या में स्वजन पहुंचते हैं। कई बार इलाज में देरी या मरीज की मौत के बाद विवाद बढ़ जाता है।
ऐसे में सुरक्षा कर्मियों की भूमिका केवल भीड़ नियंत्रित करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उन्हें तत्काल हस्तक्षेप कर चिकित्सकों, मरीजों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होती है। हटाने के पीछे है यह दो प्रमुख वजह-
1. मरीज की मौत के बाद डाक्टरों पर हुआ था हमला
6 सितंबर 2026 को रिम्स के सर्जरी विभाग के सी-टू वार्ड में एक महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। इस दौरान दो जूनियर डाक्टरों के साथ मारपीट की गई।
आरोप है कि हमलावरों ने सलाइन चढ़ाने वाली राड से चिकित्सकों पर हमला किया। घटना के विरोध में जूनियर डज्ञक्टरों ने इमरजेंसी में करीब एक घंटे तक कार्य बहिष्कार किया।
प्रबंधन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का आश्वासन मिलने के बाद काम शुरू हुआ। इस घटना के बाद जूनियर डाक्टरों ने परिसर में त्वरित कार्रवाई करने वाली सुरक्षा टीम गठित करने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी।
2. मारपीट की घटना नहीं रोक सके होमगार्ड के जवान
इससे पहले 25 अगस्त 2025 को रिम्स की इमरजेंसी में पीजी चिकित्सकों और पारा मेडिकल छात्रों के बीच मारपीट हुई थी। घटना के बाद पारा मेडिकल छात्रों ने काम बाधित कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
अगस्त 2024 में भी जूनियर डाक्टरों और सुरक्षा कर्मियों के बीच विवाद के बाद मारपीट हुई थी। इन घटनाओं ने अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा कर्मियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए।
क्यों बदली जा रही है सुरक्षा व्यवस्था
रिम्स में इमरजेंसी, ट्रामा सेंटर, सर्जरी वार्ड और अन्य संवेदनशील विभागों में हर समय मरीजों और स्वजनों की आवाजाही रहती है। किसी विवाद की स्थिति में कम समय में मौके पर पहुंचना, भीड़ को नियंत्रित करना और जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करना जरूरी होता है।
रिम्स अधीक्षक डाॅ. हिरेंद्र बिरुआ बताते हैं कि प्रबंधन की नई योजना का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक अनुशासित और प्रभावी बनाना है। सैप के जवानों की तैनाती से संवेदनशील स्थानों पर त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद की जा रही है।
नई व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होने पर इमरजेंसी में हंगामा करने वालों को नियंत्रित करने, चिकित्सकों और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील वार्डों में अनधिकृत प्रवेश रोकने में मदद मिल सकती है।
