रिम्स में 8 घंटे तक इमरजेंसी में तड़पता रहा मरीज, मौत के बाद ऑक्सीजन लगाने पहुंची नर्स
रांची के रिम्स में एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है, जिसमें ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी बताई गई।

राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स)
जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एक पुरुष मरीज की मौत के बाद इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वार्ड-41 की पार्षद नीलम चौधरी ने दावा किया कि उनके रिश्तेदार को गंभीर हालत में रिम्स में भर्ती कराया गया था, लेकिन समय पर ऑक्सीजन और वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी मौत हो गई। हालांकि, रिम्स प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें तथ्यहीन बताया है।
पार्षद नीलम चौधरी के अनुसार, उनके रिश्तेदार किडनी के मरीज थे और नियमित डायलिसिस पर थे। फेफड़ों में पानी भर जाने के कारण उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। उन्हें इलाज के लिए रिम्स लाया गया, लेकिन करीब आठ घंटे तक इमरजेंसी में आवश्यक उपचार नहीं मिल सका।
किसी स्वास्थ्यकर्मी ने सक्रियता नहीं दिखाई
उनका आरोप है कि इस दौरान न तो मरीज को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई गई और न ही वेंटिलेटर की व्यवस्था हो सकी। उन्होंने बताया कि बाद में न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. सुरेंद्र के प्रयास से ट्रामा सेंटर की तीसरी मंजिल पर वेंटिलेटर की व्यवस्था कराई गई।
लेकिन जब मरीज की भर्ती से संबंधित पर्ची लेने के लिए स्वजन पहुंचे तो पता चला कि संबंधित स्टाफ नर्स पर्ची ड्राअर में रखकर चली गई थीं। इस कारण भर्ती प्रक्रिया में और देरी हुई। उनका आरोप है कि इस दौरान मरीज की गंभीर स्थिति के बावजूद किसी स्वास्थ्यकर्मी ने सक्रियता नहीं दिखाई।
मौत हो जाने के बाद ऑक्सीजन लगाने पहुंची
नीलम चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि मरीज की मौत हो जाने के बाद ही एक स्टाफ नर्स ऑक्सीजन लगाने पहुंची। उन्होंने कहा कि यह घटना रिम्स की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर खामियों को उजागर करती है। उनके अनुसार, यदि समय पर इलाज और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाते तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
दूसरी ओर, रिम्स प्रबंधन ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है। प्रबंधन का कहना है कि मरीज को चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया गया था और मामले की वस्तुस्थिति की समीक्षा की जा रही है।
घटना के बाद मरीज के स्वजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। उन्होंने अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस मामले की जानकारी नहीं है, अगर इस तरह की कोई समस्या आयी है तो इसकी जांच की जाएगी और जो भी उचित कार्रवाई होगी वो की जाएगी। हालांकि मरीज के इमरजेंसी में आने के बाद हर प्रोटोकॉल पूरा किया जाता है। - डॉ. शिशिर कुमार, पीआरओ, रिम्स
