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रांची रिम्स में करोड़ों की स्टरलाइजेशन मशीनें खा रहीं धूल! हर दिन 200 रुपये भाड़ा देकर ले जाया जा रहा पुराने सेंटर

Published: Wed, 16 Sep 2026 11:30 AM (IST)

रिम्स में करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित सेंट्रल स्टरलाइजेशन सेंटर कई महीनों से बंद पड़ा है, जिससे 2.5 करोड़ ...और पढ़ें

रांची रिम्स की फाइल फोटो। जागरण

रांची रिम्स की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. रिम्स का सेंट्रल स्टरलाइजेशन सेंटर कई माह से बंद।

  2. 2.5 करोड़ की मशीनें एजेंसी और मैनपावर के अभाव में बेकार।

जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में करोड़ों रुपये खर्च कर स्थापित की गई सेंट्रल स्टरलाइजेशन व्यवस्था ही लंबे समय से ठप पड़ी है। स्थिति यह है कि करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई स्टरलाइजेशन से जुड़ी मशीनें नए भवन में लगी होने के बावजूद उनका नियमित उपयोग नहीं हो पा रहा है।

सेंट्रल स्टरलाइजेशन सर्विसेज डिपार्टमेंट (सीएसएसडी) सेंटर में पिछले कई माह से न एजेंसी है और न पर्याप्त मैनपावर। इसके कारण नए क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में इस्तेमाल होने वाले आपरेशन के उपकरणों को भी करीब 500 मीटर दूर पुराने भवन स्थित सीएसएसडी सेंटर तक ले जाना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उपकरणों को पुराने भवन तक पहुंचाने के लिए ऑटो से ढुलाई की जा रही है और स्टरलाइजेशन के बाद इन्हें वापस नए भवन में लाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में अस्पताल को अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन करीब 200 रुपये उपकरणों की ढुलाई में खर्च हो रहे हैं।

नए भवन में मशीनें, लेकिन काम शुरू नहीं

क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के लिए तैयार नए भवन में अत्याधुनिक आपरेशन सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां आंखों की सर्जरी के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। लेकिन इन उपकरणों के संक्रमणमुक्त यानी स्टरलाइजेशन की व्यवस्था नए भवन में प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो पा रही है। नए भवन से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित पुराने भवन में सीएसएसडी सेंटर है।

इसी कारण नेत्र संस्थान से सर्जरी के बाद स्टरलाइजेशन के लिए उपकरण पुराने भवन भेजे जाते हैं। कई मामलों में उपकरणों को लाने-ले जाने के लिए ऑटो का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे एक तरफ अस्पताल के कर्मचारियों का समय बर्बाद होता है, वहीं दूसरी तरफ आपरेशन के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता और समय पर स्टरलाइजेशन को लेकर भी अतिरिक्त दबाव बना रहता है।

14 मदों के उपकरण, कुल कीमत 2.4939 करोड़ रुपये 

इन सभी बंद उपकरण की कुल अनुमानित कीमत 2,49,39,000 रुपये यानी करीब 2.49 करोड़ रुपये है।

क्र. उपकरण अनुमानित कीमत (रुपये में)
1 हारिजेंटल स्टरलाइजर हाई प्रेशर हाई वैक्यूम डबल डोर स्टीम स्टरलाइजर ₹62.50 लाख
2 हारिजेंटल स्टरलाइजर हाई प्रेशर हाई वैक्यूम डबल डोर स्टरलाइजर ₹38.50 लाख
3 ईटीओ स्टरलाइजर, 90-100 लीटर ₹42.50 लाख
4 वाशर डिसइंफेक्टर विद इनलेट ट्राली डबल डोर, 275 लीटर ₹38.50 लाख
5 हारिजेंटल स्टरलाइजर हाई प्रेशर हाई स्पीड इंस्ट्रूमेंट स्टरलाइजर ₹14 लाख
6 एसएस स्टोरेज रैक ₹13 लाख
7 अल्ट्रासोनिक क्लीनर, 30 लीटर ₹11.95 लाख
8 एसएस कटिंग एंड पैकिंग टेबल ₹6.10 लाख
9 एसएस वर्क टेबल विद डबल सिंक ₹5.65 लाख
10 गाज कटिंग मशीन विद टेबल ₹4.65 लाख
11 कंटीन्युअस बैंड सीलर्स विद एसएस टेबल ₹4.45 लाख
12 एसएस टेबल ट्राली विद टू सेल्फ ₹2.99 लाख
13 एसएस पास बाक्स ₹2.75 लाख
14 रेगम रैजर विद एटैचमेंट ₹1.85 लाख
कुल   ₹2,49,39,000 (लगभग ₹2.49 करोड़)

सीएसएसडी बंद और इसका असर

सीएसएसडी का काम अस्पताल में आपरेशन और उपचार में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को वैज्ञानिक तरीके से साफ कर संक्रमणमुक्त करना है। ऑपरेशन थिएटर, सर्जिकल विभाग और अन्य संवेदनशील चिकित्सा सेवाओं के लिए इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
रिम्स में सीएसएसडी सेंटर के संचालन के लिए एजेंसी और मैनपावर की व्यवस्था नहीं होने के कारण इसका नियमित संचालन प्रभावित है।

नतीजतन करोड़ों रुपये की मशीनें होने के बावजूद उनकी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसका असर नए क्षेत्रीय नेत्र संस्थान पर भी पड़ रहा है। जहां मरीजों को आधुनिक नेत्र चिकित्सा और सर्जरी की सुविधा देने के लिए करोड़ों रुपये का भवन और उपकरण लगाए गए हैं, वहीं सर्जिकल उपकरणों के स्टरलाइजेशन के लिए उन्हें पुराने भवन तक ले जाना पड़ रहा है।

नए नेत्र संस्थान में सुविधा बढ़ी, लेकिन व्यवस्था अधूरी

क्षेत्रीय नेत्र संस्थान का उद्देश्य रिम्स में आंखों के जटिल रोगों और सर्जरी के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन नए भवन में सर्जिकल उपकरणों के स्टरलाइजेशन की स्वतंत्र और सुचारु व्यवस्था नहीं होने से पूरी प्रणाली की एक महत्वपूर्ण कड़ी कमजोर बनी हुई है।

नई मशीनें नहीं खरीदी गई है, बेहतर व्यवस्था भी है। लेकिन कोई एजेंसी यहां काम नहीं कर रही है, जो एजेंसी पुराने भवन में कार्यरत है उसने भी काम करने से मना कर दिया है, मैनपावर भी नहीं है जिससे यहां इन उपकरण का उपयोग हो सके।

-डॉ. सुनील कुमार, एचओडी, नेत्र विभाग। 

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