राज्य ब्यूरो, रांची : जनसंख्या वृद्धि को रोकने तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए संचालित परिवार कल्याण कार्यक्रमों की सफलता में विवाह का निबंधन बाधक बन रहा है। विवाह के निबंधन में परेशानी होने से इस कार्यक्रम के तहत सहिया को मिलनेवाली पारिश्रमिक उन्हें नहीं मिल पाती। इससे सहिया बच्चों के गैप रखने के लिए नवदंपत्ति को प्रोत्साहित करने में रुचि नहीं लेतीं।

समीक्षा में यह बात सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे ने शादियों के निबंधन को सरल और सुविधाजनक बनाने के निर्देश सभी उपायुक्तों को दिए हैं। इसके लिए उन्होंने सभी उपायुक्तों को पत्र लिखा है। परिवार कल्याण कार्यक्रमों में सहिया को आसानी से पारिश्रमिक उपलब्ध हो सके, इसके लिए ये निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत संचालित परिवार कल्याण कार्यक्रम में नवविवाहित युवाओं की पहचान तथा उन्हें बच्चे के जन्म में गैप सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सहिया को पारिश्रमिक दिए जाते हैं। इसके लिए विवाह का निबंधन जरूरी होता है। विवाह के निबंधन में परेशानी होने से इस कार्यक्रम के तहत सहिया को मिलनेवाली पारिश्रमिक उन्हें नहीं मिल पाती। इससे सहिया बच्चों के गैप रखने के लिए नवदंपत्ति को प्रोत्साहित करने में रुचि नहीं लेतीं।

कई मामले में निबंधन नहीं होने से सहिया को निर्धारित पारिश्रमिक नहीं मिल पाती थी।

सहिया को मिलनेवाली पारिश्रमिक :

- शादी के बाद पहले बच्चे के जन्म में दो साल के गैप रखने के लिए प्रोत्साहित करने पर : प्रति युगल 500 रुपये।

- पहले और दूसरे बच्चे के जन्म में गैप रखने के लिए प्रोत्साहित करने पर : प्रति युगल 500 रुपये।

- दो बच्चों के बाद नसबंदी या बंध्याकरण के लिए प्रोत्साहित करने पर : प्रति युगल 1,000 रुपये।

Posted By: Jagran

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