रांची : संयुक्त बिहार के समय से ही बिना आवश्यक योग्यता (डिग्री या डिप्लोमा) वाले तथा अनुभव के आधार पर निबंधित फार्मासिस्टों का निबंधन खत्म होगा। झारखंड फार्मेसी काउंसिल ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में इनके निबंधन का नवीकरण नहीं करने का निर्णय लिया है। हालांकि काउंसिल ने न्यायालय के आदेश के आलोक में महाधिवक्ता से विधि परामर्श भी लेने की अनुशंसा स्वास्थ्य विभाग से की है। काउंसिल के अध्यक्ष डा. टीपी वर्णवाल ने बुधवार को काउंसिल की दूसरी बैठक के बाद मीडिया को इसकी जानकारी दी। बताया जाता है कि ऐसे फार्मासिस्टों की संख्या लगभग चार हजार है।

बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, अब डिग्री व डिप्लोमाधारी सभी फार्मासिस्टों का निबंधन नए सिरे से 21 मई से शुरू होगा। 31 अगस्त तक काउंसिल द्वारा निबंधित एवं नवीकरण किए गए फार्मासिस्टों का वोटर लिस्ट तैयार होगा, जिसमें शामिल फार्मासिस्ट काउंसिल के छह सदस्यों का चुनाव करेंगे। 31 अगस्त के बाद निबंधित फार्मासिस्ट चुनाव में भाग नहीं ले सकेंगे। अध्यक्ष के अनुसार, निबंधन के लिए फार्मासिस्ट का झारखंड में निवास करना तथा काम करना अनिवार्य है। बैठक में काउंसिल के सदस्य जादूनाथ मार्डी, अनिल प्रसाद सिंह, अमित कुमार, हीरालाल कश्यप आदि भी उपस्थित थे।

फार्मेसी इंस्पेक्टर की होगी नियुक्ति

काउंसिल की बैठक में प्रत्येक जिलों में फार्मेसी इंस्पेक्टरों के पद सृजित किए जाने का निर्णय लिया गया। इसकी अनुशंसा स्वास्थ्य विभाग से की जाएगी। फार्मेसी इंस्पेक्टरों का कार्य ड्रग इंस्पेक्टरों से भिन्न होगा।

क्या है मामला?

संयुक्त बिहार में तैयार फ‌र्स्ट रजिस्ट्रर में केवल अनुभव वाले फार्मासिस्टों का निबंधन किया गया था। उसके बाद से इनके निबंधन का नवीकरण झारखंड में भी होता रहा। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे गलत बताते हुए केवल डिग्री व डिप्लोमा योग्यता वाले फार्मासिस्टों के ही निबंधन का आदेश दिया।

By Jagran