रांची, राज्य ब्यूरो। चुनावी आपाधापी में झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (JSCPCR) के पुनर्गठन की फाइल सुस्त पड़ गई है। अध्यक्ष के अलावा सदस्यों के छह पदों के लिए हाल के दिनों में आए ढाई सौ से अधिक आवेदन स्क्रीनिंग की आस में धूल फांक रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर दो-चार दिनों में आयोग के पुनर्गठन की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई तो नई सरकार बनने तक यह मामला लटक जाएगा।

बहरहाल आयोग का कार्यकाल खत्म हो जाने से 22 अप्रैल के बाद से आयोग की सारी गतिविधियां ठप पड़ गई हैं। बताते चलें कि राज्य के लगभग 56 लाख बच्चों की इस प्रतिनिधि संस्था के निष्क्रिय पड़ जाने से स्कूलों की मानीटरिंग, बच्चों से जुड़े आपराधिक और गैर आपराधिक मामलों की सुनवाई बंद है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग तक जो आवेदन पहुंचे हैं, उनमें 38 अध्यक्ष पद के लिए है।

आवेदनों की स्क्रीनिंग और साक्षात्कार जैसी प्रक्रिया से गुजरने के बाद आयोग का पुनर्गठन संभव हो सकेगा। इससे इतर विधानसभा चुनाव की अधिसूचना कभी भी जारी हो सकती है, जिससे पुनर्गठन का यह मामला खटाई में पड़ सकता है।

गौरतलब है कि आयोग के कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व ही आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष आरती कुजूर ने सरकार को पत्र भेजकर आयोग के पुनर्गठन तक के लिए आयोग के कार्यकाल को एक्सटेंशन देने का अनुरोध किया था। इसी के समानांतर निश्शक्तता आयुक्त का कार्यकाल भी समाप्त हो चला था, जिसे एक वर्ष का एक्सटेंशन दे दिया गया। बहरहाल आयोग में पिछले छह महीने से ताला लटका है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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