एक दिन पहले यहां जलती है होलिका, रांची की 300 साल पुरानी परंपरा जानकर रह जाएंगे दंग
रांची के चुटिया स्थित प्राचीन श्री राम मंदिर में होलिका दहन संपन्न हुआ। यहां 1685 में नागवंशी राजा द्वारा शुरू ...और पढ़ें
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चुटिया में पाहन ने काटी अरंडी की डाल और जल उठी होलिका।
HighLights
रांची के चुटिया में एक दिन पहले होलिका दहन।
नागवंशी राजा ने 1685 में शुरू की यह परंपरा।
2026 में होलिका दहन 2 मार्च, चंद्र ग्रहण 3 मार्च।
जागरण संवाददाता, रांची। रांची के इस मंदिर में होलिका दहन की परंपरा देश में सबसे अलग है। प्राचीन श्री राम मंदिर फगडोल जतरा मेला समिति की ओर आयोजित रविवार को होलिका दहन संपन्न हो गया।
देश में होलिका दहन की तिथि से एक दिन पहले यहां होलिका दहन की परंपरा नागवंशी राजा ने 1685 ईस्वी में शुरू की थी।
आठ सौ सालों तक नागवंशी राजाओं की राजधानी रही चुटिया में इस परंपरा का निर्वहन आज तक होता आ रहा । सरना व सनातन का समन्वय भी यहां दिखता है।
गांव के पाहन राम पहान ने अरंडी की डाल को काटा और फिर बिना पीछे मुड़े अपने घर चले गए। इसके पूर्व पाहन ने होलिका के चारों तरफ जलार्पण किया।
पाहन के प्रस्थान करने के बाद होलिका दहन का अन्य कार्यक्रम शुरू हुआ। मंदिर के महंत गोकुल दास एवं नगर पुरोहित शशिभूषण पांडेय ने मधुर स्वर में आरती की।
महंत ने मंगल शंख ध्वनि की। सैकड़ों की संख्या में मौजूद भक्तों ने जयश्रीराम के गगनभेदी नारे लगाए। ग्राम देवता से साल भर में जाने-अनजाने गलती के लिए क्षमा मांगी गई।
इसके बाद चुटिया व राज्य की खुशहाली की कामना की गई। महंंत व पुरोहित ने होलिका में आग लगाई और फिर जल उठी। विजय साहु ने चुटिया की इस महान ऐतिहासिक परंपरा से अवगत कराया। विजय ने बताया कि राजा ने पहले यहां शुरू की।
चुटिया के बाद ही शहर में होलिका दहन होता है। दहन के समय ही भारत के विजय की खबर पहुंची तो भक्त और उत्साहित हो गए और जय-जय श्री राम का उद्घोष करने लगे। दहन कार्यक्रम में कांग्रेस नेता आदित्य विक्रम जायसवाल भी पहुंचे।
आयोजन में बैजनाथ केशरी, आशीष कुमार, विजय तिर्की, अनीश साहू, राकेश साहू, अजय ठाकुर, अमित साहू, गोपाल साहू, राणा नायक सहित काफी संख्या में चुटिया के लोग मौजूद थे।
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देशभर में होलिका दहन आज
साल 2026 में होलिका दहन 2 मार्च, सोमवार को है। इस बार तिथियों और नक्षत्रों की गणना थोड़ी जटिल है, क्योंकि इसी दौरान भद्रा काल और चंद्र ग्रहण दोनों का संयोग बन रहा है।
होलिका दहन का समय
पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 05:18 बजे शुरू होगी और 3 मार्च 2026 को शाम 04:33 बजे समाप्त होगी।
शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन भद्रा रहित पूर्णिमा की रात को किया जाता है। 2 मार्च को रात 12:50 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहेगा।
इसलिए दहन का सबसे शुद्ध और शुभ समय 2 मार्च की मध्यरात्रि 12:50 बजे से 3 मार्च की सुबह 02:02 बजे के बीच रहेगा।
चंद्र ग्रहण और होली का प्रभाव
3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण लग रहा है। इस कारण त्योहार के कार्यक्रम में बदलाव रहेगा:
होलिका दहन: 2 मार्च की देर रात (भद्रा के बाद)।
चंद्र ग्रहण: 3 मार्च को पूरे दिन इसका प्रभाव और सूतक रहेगा।
रंग वाली होली (धुलेंडी): चंद्र ग्रहण के अगले दिन यानी 4 मार्च 2026, बुधवार को रंगों वाली होली खेली जाएगी।
मुख्य तिथियां
- होलिका दहन: 2 मार्च 2026
- चंद्र ग्रहण: 3 मार्च 2026
- रंगों वाली होली: 4 मार्च 2026
