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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Ranchi Violence: दंगाइयों के फोटो लगाने पर नया बवाल... हेमंत सरकार ने SSP को भेजा नोटिस, पूछा-क्‍यों लगाए पोस्‍टर

By Alok ShahiEdited By:
Published: Thu, 16 Jun 2022 02:03 AM (IST)Updated: Thu, 16 Jun 2022 08:59 AM (IST)

Ranchi Violence गृह विभाग के प्रधान सचिव ने रांची हिंसा के दंगाइयों का पोस्टर सड़क किनारे लगाने पर रांची के ...और पढ़ें

Ranchi Violence: दंगाइयों का फोटो सार्वजनिक स्थानों पर लगाने के मामले में नया मोड़ आ गया है।
Ranchi Violence: दंगाइयों का फोटो सार्वजनिक स्थानों पर लगाने के मामले में नया मोड़ आ गया है।

रांची, राज्य ब्यूरो। Ranchi Violence झारखंड की राजधानी रांची में पिछले शुक्रवार को हुई भारी हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल उपद्रवियों का पोस्टर चौक-चौराहों पर लगाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। राज्यपाल रमेश बैस के निर्देश पर रांची पुलिस ने मंगलवार को पोस्टर लगाया था, लेकिन सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के हस्तक्षेप के बाद इसे हटा दिया गया।

बुधवार की देर रात इस मामले में गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का ने रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार झा से स्पष्टीकरण मांगा है। प्रधान सचिव ने उन्हें नोटिस भेजकर पोस्टर लगाने की कार्यवाही को गलत बताया और इस बाबत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक न्यायादेश का हवाला दिया। उन्होंने उपद्रव की घटनाओं में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों के फोटो सहित पोस्टर लगाए जाने के संबंध में दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

प्रधान सचिव ने कहा है कि 10 जून को रांची में हुई घटनाओं में नाजायज मजमा में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों और हिंसा में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों के फोटो सहित पोस्टर 14 जून को रांची पुलिस द्वारा लगाए गए, जिनमें कई व्यक्तियों के नाम एवं अन्य विवरण भी दिए गए। यह विधिसम्मत नहीं है और उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा पीआईएल संख्या-532/2020 में नौ मार्च, 2020 को पारित न्यायादेश के विरुद्ध है।

इस आदेश में न्यायालय ने सड़क किनारे लगे बैनरों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए थे। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि बिना कानूनी अधिकार के व्यक्तियों के बारे में व्यक्तिगत जानकारी वाले बैनर सड़क किनारे नहीं लगाएं। यह मामला और कुछ नहीं, बल्कि लोगों की निजता में एक अनुचित हस्तक्षेप है। यह भारत के संविधान के अनुच्छेद - 21 का भी उल्लंघन है।

हो सकती है राजभवन और सरकार में तनातनी

रांची पुलिस द्वारा पोस्टर लगाने के बाद हटाने की घटना से राजभवन और सरकार के बीच तनातनी हो सकती है। उल्लेखनीय है कि रांची उपद्रव की घटना के बाद राज्यपाल रमेश बैस ने राज्य के पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक, रांची के उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक को बुलाकर घटना की जानकारी ली थी। उन्होंने निर्देश दिया था कि रांची पुलिस उपद्रव में शामिल लोगों के पोस्टर चौक-चौराहों पर लगाए ताकि उनकी पहचान की जा सके। इसी आधार पर पुलिस ने पोस्टर लगाए। इसके बाद पोस्टर तुरंत हटा लिए गए। हालांकि राजभवन ने इसपर किसी प्रकार की टिप्पणी से इन्कार किया है।