पढ़ाने के लिए मां ने बेचा ‘सोना’, बिटिया ने रांची में टॉप कर लौटाया मान; अब गोल्ड मेडल से चमकेगी
दीक्षा कुमारी ने रांची विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र में 80% अंक प्राप्त कर टॉप किया है और 9 सितंबर को गोल्ड ...और पढ़ें

दीक्षा कुमारी की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
दीक्षा कुमारी रांची विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र की टॉपर बनीं।
मां ने पढ़ाई के लिए अपने शादी के गहने बेचे।
दिवाकर सिंह, रांची। माता-पिता का त्याग ही बच्चों की सफलता की असली नींव होता है, जब ये नींव मजबूत होता है तो बच्चें भी अपनी प्रतिभा से पूरे मानस पटल पर छा जाते हैं। कुछ यही साबित किया है 80 प्रतिशत अंक लाकर रांची विश्वविद्यालय के इकोनामिक्स की विवि टापर बनी दीक्षा कुमारी की मां नीतू देवी ने।
उनका संघर्ष और त्याग के कारण उनकी बेटी नौ सितंबर को रांची विवि के 39वें दीक्षा समारोह में गोल्ड मेडल से सम्मानित होगी। बेटी दीक्षा की पढ़ाई के लिए मां ने अपनी शादी के गहने बेच दिए और उसे पढ़ाई में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं होने दी।
वहीं बेटी दीक्षा ने भी पिता के एक्सीडेंट होने के बाद आनलाइन ट्यूशन पढ़ाकर पूरा परिवार चलाने में अपना सहयोग दिया और अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। बिरसा कालेज खूंटी से अपनी पीजी की पढ़ाई पूरी की और बता दिया कि पढ़ाई के लिए लगन की जरूरत होती है न कि संस्थान की।
पढ़ाई नहीं रुके, इसलिए मां ने बेच दिए अपने गहने
मुरहू की रहने वाली दीक्षा कुमारी ने 2017 में संत जेवियर्स कालेज से इकोनामिक्स से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान उनके पिता प्रकाश प्रसाद साहू का एक्सीडेंट हो गया। जिसके बाद घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गयी।
इसके बाद दीक्षा यूपीएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली चली गयी, लेकिन यहां के कोचिंग में पैसे के आभाव के कारण समस्या हो रही थी। जिसके देखकर इनकी माता नीतू देवी ने अपनी शादी के गहने बेच दिए और दो लाख रुपये देकर कोचिंग में नामांकन कराया।
इस दौरान अपना खर्च चलाने के लिए दीक्षा ने यही से ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। तैयारी के दौरान ही घर पर कर्ज का बोझ बढ़ने लगा जिसके बाद दीक्षा वापस 2021 में मुरहू चली आयी और 2023 में पीजी में नामांकन लिया।
अंतरराष्ट्रीय बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर की पढ़ाई, घर में किया सहयोग
वापस मुरहू आने के बाद दीक्षा ने दो साल तक पहले घर के आसपस के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर घर के खर्च में पिता का सहयोग करने लगी। इसके बाद आनलाइन ट्यूशन की जानकारी मिली और अंतराष्ट्रीय स्तर पर इसकी शुरूआत हुई।
दीक्षा ने बताया कि अमेरिका, अर्जेंटीना सहित लगभग चार से पांच देशों के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है। सभी के ट्यूशन का समय-अलग होता है और इसके साथ ही अपनी पढ़ाई भी करती थी।
मुझे लगता था कि पीजी विभाग की कोई छात्रा विवि की टापर बनेगी, लेकिन चौथे सेमेस्टर में मैंने पूरे लगन से इसकी तैयारी की थी, जिसका रिजल्ट मेरे सामने हैं। टापर बनने की सबसे अधिक खुशी मेरी माता-पिता और शिक्षिका डा. जया भारती को हुई।
पढ़ाई के साथ बाकी गतिविधियों में भी दीक्षा रहती है आगे
बिरसा कॉलेज खूंटी की इकोनामिक्स विभाग की विभागाध्यक्ष डा. जया भारती ने बताया कि दीक्षा केवल पढ़ाई में ही नहीं बल्कि यूथ फेस्टिवल में भी बढ़चढ़ कर शामिल होती है। यही नहीं पीजी के पढ़ाई के दौरान दीक्षा ने सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी और आज भी ये न तो फेसबुक पर है और न ही किसी और जगह।
दीक्षा का कहना है कि पढ़ाई के लिए घंटे आवश्यक नहीं है बल्कि इसके लिए सही रणनीति जरूरी है। मैंने सिलेबस के साथ-साथ पांच साल का क्वेश्चन का भी अध्ययन किया था जो मेरे लिए फायदेमंद साबित हुआ।
