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रांची विश्वविद्यालय में हिंदी पीएचडी शोध के लिए रिकॉर्ड आवेदन, इसके बाद इंग्लिश, इकोनामिक्स और हिस्ट्री

Published: Mon, 14 Sep 2026 10:45 AM (IST)

रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी नामांकन के लिए हिंदी विषय में सर्वाधिक आवेदन आए हैं, जहां 19 सीटों के लिए 42 ...और पढ़ें

चार विषयों में आए हैं सबसे अधिक आवेदन इसमें हिंदी विषय है सबसे आगे।

चार विषयों में आए हैं सबसे अधिक आवेदन इसमें हिंदी विषय है सबसे आगे।

HighLights

  1. रांची विश्वविद्यालय में हिंदी पीएचडी के लिए सर्वाधिक आवेदन।

  2. 19 सीटों के लिए 42 अभ्यर्थियों ने किया है आवेदन।

  3. शोध के विषय अब सामाजिक विमर्शों पर केंद्रित।

दिवाकर सिंह, जागरण, रांची। आज हिंदी दिवस है और इस दिन हिंदी के महत्व को जानने और समझने की बात की जाती है। लेकिन ऐसा नहीं कि हिंदी का महत्व केवल एक ही दिन के लिए है। पूरे वर्ष हिंदी का सम्मान किया जाता है और इस विषय को लेकर विद्यार्थियों के साथ शोधार्थियों में भी क्रेज है। रांची विश्वविद्यालय में इस समय पीएचडी में नामांकन की प्रक्रिया चल रही है।

जिसमें हिंदी विषय में शेध करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या सबसे अधिक है। इस विषय ने बाकी सभी विषयों को इसलिए भी पीछे छोड़ दिया है क्योंकि इस विषय में सीटें कम हैं और आवेदन देने वाला की संख्या दोगुने से भी अधिक है। इसके बाद अंग्रेजी, इतिहास और अर्थशास्त्र का नंबर आता है।

हिंदी में शोध करने वालों का बढ़ा क्रेज, इसके बाद अंग्रेजी

रांची विश्वविद्यालय में हिंदी विषय में शोध करने वालों की संख्या में तेजी आई है। वर्तमान में दो दिन पहले मिले आंकड़े के अनुसार पीएचडी नामांकन के लिए हिंदी विभाग में कुल 42 आवेदन अभ्यर्थियों ने किए हैं। जबकि इसमें सीटों की संख्या मात्र 19 हैं।

विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. हीरानंदन प्रसाद ने बताया कि प्रतिवर्ष शोध करने वालों की संख्या बढ़ रही है। वहीं नेट और जेआरएफ पास करने वालों की संख्या में भी बढोत्तरी हो रही है। प्रत्येक वर्ष 10 से 15 विद्यार्थी नेट और जेआरएफ पास कर रहे हैं।

हिंदी में शोध करने के विषय में भी हो रहा है बदलाव

हिंदी भाषा में शोध करने वाले शोधार्थियों के चुनने वाले विषय में भी अब बदलाव हो रहा है। पहले जहां साहित्य से जुड़े विषयों पर अधिक शोध हुआ करते थे, वहीं अब हिंदी विषय में किन्नर विमर्श पर भी शोध करने वालों की संख्या बढ़ रही है।

डाॅ. हीरानंदन प्रसाद ने बताया कि अब किन्नर विमर्श के अलावा बाल विमर्श, वृद्ध विमर्श और आदिवासी विमर्श जैसे विषयों पर हिंदी में शोध किए जा रहे हैं। इसके अलावा समाज से जुड़े कई विषयों से हिंदी को जोड़कर शोध किए जा रहे हैं।

बाकी तीन विषयों में भी सीटों से अधिक आवेदन

हिंदी के अलावा तीन और भी विषय हैं जिसमें सीटों से अधिक आवेदन पीएचडी के लिए आए हैं। इसमें अर्थशास्त्र में 12 सीटों के लिए 29 आवेदन, अंग्रेजी के 25 सीटों के लिए 37 आवेदन और इतिहास के 10 सीटों के लिए कुल 41 आवेदन आ रही है। इसके अलावा अन्य विषयों में भी सीटों से अधिक आवेदन हैं लेकिन इन विषयों में ये अंतर अधिक है।