गैस या हार्ट अटैक? सीने के हल्के दर्द को न करें नजरअंदाज, युवाओं में क्यों बढ़ रहा है कम उम्र में दिल का दौरा?
रांची में 'प्रिवेंट हार्ट समिट' में विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक पर चिंता जताई, जिसके मुख्य कारण अनियमित ...और पढ़ें

प्रिवेंट हार्ट समिट में विशेषज्ञों ने कहा- जीवनशैली में बदलाव के साथ समय पर जांच जरूरी।
HighLights
युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामले गंभीर चिंता का विषय।
अनियमित जीवनशैली, गलत खानपान और तनाव प्रमुख कारण।
समय पर जांच, संतुलित जीवनशैली हृदय रोगों से बचाव में सहायक।
जागरण संवाददाता, रांची। युवाओं में कम उम्र में हार्ट अटैक के मामले अब गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। अनियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद नहीं लेना, गलत खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसे कारण युवाओं में हृदय रोग का खतरा बढ़ा रहे हैं।
रविवार को होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित ‘प्रिवेंट हार्ट समिट-2026’ में देशभर से आए हृदय रोग विशेषज्ञों ने हृदय रोगों की रोकथाम से लेकर आधुनिक उपचार तक पर विस्तार से चर्चा की।
सम्मेलन का आयोजन कार्डियोलाजिकल सोसाइटी आफ इंडिया, झारखंड चैप्टर की ओर से किया गया। कार्डियोलाजिस्ट डाॅ. राजेश झा ने युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों पर विशेष चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज युवाओं की जीवनशैली तेजी से बदल रही है।
देर रात तक मोबाइल और डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल, काम या पढ़ाई का दबाव और अनियमित दिनचर्या के कारण पर्याप्त नींद नहीं मिल रही है। इसके साथ फास्ट फूड, अत्यधिक तला-भुना और वसायुक्त भोजन, अधिक नमक-चीनी का सेवन तथा व्यायाम की कमी भी हृदय पर असर डाल रही है। उन्होंने कहा कि कम उम्र को हृदय रोग से सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता।
सीने के दर्द को सामान्य न समझें
डाॅ. राजेश झा ने कहा कि सीने में दबाव या दर्द, अचानक सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना, बेचैनी, कमजोरी अथवा दर्द का हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े तक पहुंचना हृदय संबंधी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों को गैस या सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय जांच कराने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मरीज की स्थिति और जांच के आधार पर यदि हृदय की धमनियों में रुकावट की आशंका होती है तो एंजियोग्राफी कराई जाती है। इससे हृदय की नसों में रक्त प्रवाह और संभावित रुकावट की स्थिति का पता लगाने में मदद मिलती है।
रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक दवा, एंजियोप्लास्टी या अन्य उपचार का निर्णय लेते हैं। हालांकि प्रत्येक मरीज में एंजियोग्राफी की आवश्यकता नहीं होती। इसका निर्णय मरीज के लक्षण और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।
इलाज से पहले रोकथाम पर जोर
सम्मेलन की थीम ‘प्रिवेंटिव एंड क्लिनिकल कार्डियोलाजी, ब्रिजिंग प्रिवेंशन विद बेटर पेशेंट केयर रही। विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक हृदय चिकित्सा का उद्देश्य केवल बीमारी होने के बाद उपचार करना नहीं, बल्कि जोखिम कारकों की पहचान कर बीमारी को रोकना भी है।
इसके लिए रक्तचाप, रक्त शर्करा, कोलेस्ट्राल और वजन की नियमित निगरानी जरूरी है। धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन को हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
कोलेस्ट्राल के नए संकेतकों पर चर्चा
सम्मेलन में कोलेस्ट्राल प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने सामान्य एलडीएल कोलेस्ट्राल के साथ लिपोप्रोटीन-ए, एपीओ-बी और नान-एचडीएल कोलेस्ट्राल जैसे जोखिम संकेतकों की भूमिका पर विचार साझा किए। तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम वाले मरीजों में आक्रामक वसा प्रबंधन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
हार्ट फेल्योर में हृदय के साथ किडनी और चयापचय पर ध्यान
हार्ट फेल्योर सम्मेलन का प्रमुख विषय रहा। विशेषज्ञों ने कार्डियो-किडनी-मेटाबोलिक सिंड्रोम, एचएफपीईएफ और स्टेज-बी हार्ट फेल्योर के प्रबंधन पर चर्चा की। बताया गया कि हार्ट फेल्योर के मरीजों के उपचार में केवल हृदय ही नहीं, बल्कि किडनी और शरीर के चयापचय स्वास्थ्य को भी साथ में देखना जरूरी है।
एट्रियल फिब्रिलेशन, अनियमित धड़कन, बेहोशी या अचानक चक्कर आने की समस्या तथा हृदय के वाल्व से जुड़ी बीमारियों के आधुनिक प्रबंधन पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी। रोबोटिक माइट्रल वाल्व सर्जरी जैसी आधुनिक उपचार तकनीक पर वैज्ञानिक प्रस्तुति हुई।
मोटापा भी बन रहा हृदय रोग का बड़ा जोखिम
मोटापा और हृदय रोग के संबंध पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने सेमाग्लूटाइड और टिरजेपाटाइड जैसी नई दवाओं पर विचार साझा करते हुए बताया कि इनका उपयोग मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जाता है। वजन कम करने के साथ इनके हृदय संबंधी प्रभावों पर भी चर्चा की गई।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बदल रही कार्डियोलाजी
सम्मेलन में चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से बढ़ती तकनीक को भी प्रमुखता दी गई। डिजिटल स्वास्थ्य, पहनने योग्य उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से हृदय रोगों की रोकथाम और निगरानी की संभावनाओं पर चर्चा हुई। कोरोनरी इंटरवेंशन में जीरो-मेटल एंजियोप्लास्टी और ड्रग-कोटेड बैलून जैसी नई तकनीकों पर भी विशेषज्ञों ने विचार रखे।
महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर विशेष सत्र
महिलाओं में हृदय रोग के जोखिम को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। प्री-एक्लेम्पसिया, गर्भावधि मधुमेह और रजोनिवृत्ति के दौरान बढ़ने वाले हृदय संबंधी जोखिमों की पहचान और रोकथाम पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी। इसके अलावा आपरेशन से पहले हृदय संबंधी जोखिम का आकलन और रूमेटिक फीवर के प्रबंधन पर भी चर्चा हुई।
सम्मेलन में झारखंड के अलावा कोलकाता, पटना, भुवनेश्वर, लखनऊ और जयपुर सहित विभिन्न शहरों से वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ शामिल हुए। आयोजन अध्यक्ष डा. प्रकाश कुमार, आयोजन सचिव डाॅ. वरुण कुमार, वैज्ञानिक अध्यक्ष डाॅ. प्रशांत कुमार और कोषाध्यक्ष डाॅ. मुकेश अग्रवाल के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विशेषज्ञों का संदेश रहा कि हार्ट अटैक से बचाव की शुरुआत अस्पताल से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली से होती है। पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और जोखिम कारकों की समय पर जांच युवाओं समेत हर आयु वर्ग में हृदय रोग का खतरा कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
