6 हजार में बुक किया 1BHK फ्लैट...अंदर का नजारा देख उड़े पिता के होश, रांची में धड़ल्ले से चल रहा शॉर्ट स्टे का खेल
रांची में शॉर्ट स्टे के लिए ऑनलाइन बुक किए गए फ्लैट्स आवासीय सोसायटियों के लिए नई परेशानी बन गए हैं, ...और पढ़ें

शार्ट स्टे के कारोबार से सोसायटी में रहने वाले परिवारों की बढ़ी परेशानी।
HighLights
शॉर्ट स्टे फ्लैट्स से आवासीय सोसायटियों में बढ़ी परेशानी।
पिता ने बेटी को ब्वॉयफ्रेंड संग फ्लैट में पकड़ा, हंगामा।
निवासियों ने सुरक्षा, निजता भंग होने पर जताई चिंता।
जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदने वाले परिवार अब एक नई परेशानी से जूझ रहे हैं। सुरक्षित और पारिवारिक माहौल की उम्मीद में खरीदे गए फ्लैटों में कुछ मालिक और बिल्डर अधिक कमाई के लिए शार्ट स्टे के नाम पर अनजान लोगों को कुछ घंटे या एक-दो दिन के लिए ठहराने लगे हैं।
आनलाइन बुकिंग के जरिये ऐसे फ्लैटों में युवक-युवतियों की आवाजाही से आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा, निजता और बच्चों के माहौल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बीते सप्ताह चेशायर रोड स्थित एक सोसायटी में ऐसे ही एक फ्लैट को लेकर उस समय भारी हंगामा हो गया, जब एक पिता अपनी बेटी का पीछा करते हुए सोसायटी पहुंच गया।
पिता को बेटी के कॉलेज जाने की बात पर संदेह था। पीछा करते हुए वह सोसायटी के एक वन बीएचके फ्लैट तक पहुंचा। बताया गया कि फ्लैट करीब छह हजार रुपये में शार्ट स्टे के लिए बुक किया गया था।
15 मिनट तक हेलमेट से पीटता रहा दरवाजा
पिता ने फ्लैट का दरवाजा हेलमेट से जोर-जोर से पीटना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर सोसायटी में रहने वाले परिवार अपने फ्लैट से बाहर निकल आए। करीब 15 मिनट बाद दरवाजा खुला और युवती अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ बाहर निकली।
इसके बाद पिता ने बेटी के साथ मारपीट शुरू कर दी और गाली-गलौज करने लगा। इसी बीच युवक वहां से निकल गया। करीब एक घंटे तक सोसायटी में अफरा-तफरी का माहौल रहा। घटना के बाद वहां रहने वाले लोगों ने शार्ट स्टे के लिए फ्लैट दिए जाने को लेकर सवाल उठाए।
निवासियों का कहना था कि सोसायटी के कुछ फ्लैट आनलाइन बुकिंग के माध्यम से थोड़े समय के लिए दिए जा रहे हैं। इससे हर दिन नए लोगों की आवाजाही होती है और परिवारों को यह तक पता नहीं रहता कि उनके आसपास कौन ठहरा हुआ है।
रात दो बजे तक तेज आवाज में पार्टी, विरोध पर धमकी
चिरौंदी मोरहाबादी स्थित एसोटेक हिल्स में भी बीते दिनों शार्ट स्टे फ्लैट को लेकर विवाद की स्थिति बनी। सोसायटी के लोगों के अनुसार, रात करीब दो बजे शार्ट स्टे के लिए बुक फ्लैट में कुछ युवा पार्टी कर रहे थे। तेज आवाज में संगीत बजाया जा रहा था और शराब पीने की भी बात सामने आई।
इससे परेशान होकर सोसायटी के कुछ स्थायी निवासी उन्हें समझाने पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद युवाओं ने विरोध करने वाले लोगों से अभद्र व्यवहार किया और धमकी दी। कुछ लोगों ने खुद को दबंग बताते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए फ्लैट बुक किया है और वे पार्टी करेंगे। इस घटना के बाद सोसायटी के स्थायी निवासियों में नाराजगी बढ़ गई।
बिल्डर को मुनाफा, खरीदार के हिस्से में परेशानी
फ्लैट खरीदने के लिए लोग वर्षों तक बैंक की किस्त चुकाते हैं। किसी ने 70 लाख तो किसी ने एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर घर खरीदा है। मकसद होता है कि परिवार को सुरक्षित और अच्छा परिवेश मिले।
लेकिन यदि उसी सोसायटी के कुछ फ्लैट रोजाना या कुछ दिनों के किराये के लिए होटल जैसी व्यवस्था में बदल दिए जाएं, तो स्थायी रूप से रहने वाले परिवारों की परेशानी बढ़ना तय है। निवासियों का आरोप है कि उन्होंने बिल्डर और फ्लैट संचालकों से शार्ट स्टे की व्यवस्था पर रोक लगाने या स्पष्ट नियम बनाने की मांग की, लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
उनका कहना है कि एक ओर वे बैंक ऋण की भारी किस्त चुका रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपने ही घर में सुरक्षा और निजता को लेकर आशंकित रहने को मजबूर हैं।
देह व्यापार का भी आरोप, लेकिन पुलिस जांच जरूरी
स्थानीय निवासियों की ओर से राजधानी के कुछ शॉर्ट स्टे फ्लैटों के इस्तेमाल को लेकर देह व्यापार की आशंका और आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यही वजह है कि सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासन के सामने यह चुनौती भी है कि आवासीय सोसायटियों में कम अवधि के ठहराव की गतिविधियों पर स्पष्ट निगरानी व्यवस्था कैसे बनाई जाए, ताकि सामान्य वैध अतिथि और आपराधिक गतिविधि के बीच अंतर किया जा सके।
क्या कहता है कानून
हाई कोर्ट के वरीय अधिवक्ता अनूप अग्रवाल ने बताया कि कानून में यह महत्वपूर्ण अंतर है कि किसी संपत्ति में अपराध हो जाना अपने आप में मालिक को उस अपराध का आरोपी नहीं बना देता। धारा 7 में सार्वजनिक स्थानों या उनके आसपास वेश्यावृत्ति से जुड़ी गतिविधियों के संबंध में अलग प्रावधान हैं।
यदि किसी मकान मालिक को यह जानकारी हो कि उसकी संपत्ति का इस्तेमाल वेश्यावृत्ति/वेश्यालय के लिए किया जा रहा है और वह जानबूझकर उसे इसकी अनुमति देता है, तो अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 के तहत मालिक, पट्टेदार या परिसर के प्रभारी व्यक्ति पर कार्रवाई का प्रावधान है। अधिनियम की धारा 3 में ऐसी स्थिति के लिए दंड का प्रावधान है।
