रांची में जल्द बदलेगी सदर अस्पताल की तस्वीर! PET स्कैन, कैथ लैब से लेकर बोन मैरो ट्रांसप्लांट तक... कई नई सुविधाएं
रांची सदर अस्पताल में अगले छह माह में कैथ लैब, पीईटी-सीटी स्कैन और बोन मैरो प्रत्यारोपण इकाई जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं ...और पढ़ें

रांची सदर अस्पताल की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
सदर अस्पताल में तीन माह में कैथ लैब और पीईटी-सीटी स्कैन।
छह माह में बोन मैरो स्टेम सेल प्रत्यारोपण इकाई होगी शुरू।
अनुज तिवारी, रांची। रांची सदर अस्पताल को आने वाले महीनों में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस करने की तैयारी तेज हो गई है। अस्पताल में अगले तीन माह के भीतर कैथ लैब और पीईटी-सीटी स्कैन की सुविधा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं, अगले छह माह में बोन मैरो स्टेम सेल प्रत्यारोपण इकाई शुरू करने की योजना है। इसके साथ ही सदर अस्पताल को राज्य के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है।
इसके तहत टेली-एसएनसीयू और ई-संजीवनी हब बनाया जाएगा, जिससे राज्य के जिलों और ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों को विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ा जाएगा।
इन सुविधाओं के शुरू होने के बाद गंभीर हृदय रोग, कैंसर और रक्त संबंधी बीमारियों के मरीजों को जांच और उपचार के लिए दूसरे राज्यों की ओर रेफर करने की जरूरत कम होने की उम्मीद है। खासकर पीईटी-सीटी स्कैन और कैथ लैब की सुविधा से कैंसर की जांच तथा हृदय रोगियों के उपचार में बड़ी मदद मिलेगी।
तीन माह में कैथ लैब और पीईटी स्कैन
जिला स्वास्थ्य समिति के अनुसार, सदर अस्पताल में कैथ लैब और पीईटी स्कैन सुविधा तीन माह के भीतर शुरू करने की तैयारी है। सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने बताया कि पीईटी स्कैन की स्थापना के लिए जनवरी में ही सरकारी ई-निविदा जारी की जा चुकी है। इसमें निजी एजेंसी के माध्यम से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर पीईटी स्कैन उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
निविदा में कार्य अवधि 365 दिन निर्धारित की गई थी। राज्य के 2026-27 के बजट में कैंसर उपचार के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने पांच चिकित्सा महाविद्यालयों एवं अस्पतालों में पीईटी-सीटी मशीन लगाने और राज्य के अस्पतालों में कैथ लैब स्थापित करने की घोषणा की थी।
छह माह में बोन मैरो प्रत्यारोपण इकाई
सदर अस्पताल में बोन मैरो स्टेम सेल प्रत्यारोपण इकाई की स्थापना के लिए राज्य सरकार ने 13.45 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना को स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य रक्त संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राज्य में ही उन्नत उपचार उपलब्ध कराना है।
इस सुविधा के शुरू होने से थैलेसीमिया और अन्य गंभीर रक्त विकारों के मरीजों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ऐसी इकाई को पूरी क्षमता से चलाने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक, प्रत्यारोपण विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ, संक्रमण नियंत्रण, प्रयोगशाला और रक्त संबंधी उन्नत जांच सुविधाओं की भी जरूरत होगी।
सदर अस्पताल बनेगा डिजिटल स्वास्थ्य का केंद्र
सदर अस्पताल को केवल जांच और उपचार का केंद्र ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए डिजिटल स्वास्थ्य नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे राज्य स्तरीय टेली-एसएनसीयू और ई-संजीवनी हब के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
विभाग ने सिविल सर्जन से विस्तृत प्रस्ताव भी मांगा था। इसके तहत जिला अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में संचालित विशेष नवजात देखभाल इकाइयों को सदर अस्पताल से जोड़ा जाएगा।
किसी ग्रामीण या जिला अस्पताल में गंभीर नवजात भर्ती होने पर वहां की चिकित्सा टीम डिजिटल माध्यम से सदर अस्पताल के विशेषज्ञों से तत्काल सलाह ले सकेगी। जरूरत के अनुसार उपचार की दिशा तय करने और मरीज को उच्च केंद्र पर भेजने का निर्णय भी विशेषज्ञों के परामर्श से लिया जा सकेगा।
रेफर करने से पहले मिलेगा विशेषज्ञों का परामर्श
ई-संजीवनी हब के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों के मरीजों को भी विशेषज्ञ चिकित्सकों से आनलाइन परामर्श दिलाने की व्यवस्था होगी। इससे छोटे अस्पतालों में इलाजरत मरीजों के मामले में विशेषज्ञ की राय लेने के लिए उन्हें तुरंत रांची लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
गंभीर स्थिति में समय बचने के साथ यह भी तय करने में मदद मिलेगी कि मरीज को वास्तव में उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर करने की जरूरत है या स्थानीय स्तर पर उपचार जारी रखा जा सकता है।
टेली-रेडियोलाजी और टेली-आईसीयू पहले से आधार तैयार
सदर अस्पताल में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की नींव पहले ही रखी जा चुकी है। यहां टेली-रेडियोलॉजी केंद्र स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से सरकारी अस्पतालों से भेजी गई एक्स-रे, सीटी स्कैन, मैमोग्राफी और एमआरआई की डिजिटल तस्वीरों की विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट द्वारा दूर से जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। पहले चरण में छह जिलों को इससे जोड़ने की योजना है।
इस परियोजना के लिए 1.21 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। मालूम हो कि सदर अस्पताल में पहले से 128-स्लाइस सीटी स्कैन, एमआरआई, डिजिटल एक्स-रे, चौबीसों घंटे अल्ट्रासाउंड, कलर डाप्लर, डायलिसिस, ईसीजी, टीएमटी, टेली-रेडियोलॉजी और टेली-आईसीयू जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
सुविधाओं के साथ मानव संसाधन सबसे बड़ी चुनौती
नई मशीनें और डिजिटल सेवाएं शुरू होने के बाद उनका नियमित संचालन सबसे महत्वपूर्ण होगा। पीईटी-सीटी, कैथ लैब और बोन मैरो प्रत्यारोपण जैसी सुविधाओं के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी, नर्सिंग स्टाफ और चौबीसों घंटे आपात सेवा की जरूरत होगी। इसी तरह टेली-एसएनसीयू की सफलता ग्रामीण अस्पतालों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय स्तर पर आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी बताते हैं कि सदर अस्पताल के लिए यह विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ओर यहां अत्याधुनिक जांच और उपचार सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर इसे ग्रामीण और जिला अस्पतालों के लिए विशेषज्ञ परामर्श केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
यदि प्रस्तावित सुविधाएं तय समय में शुरू होती हैं और उनके लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाता है तो सदर अस्पताल रांची के साथ-साथ पूरे झारखंड की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
