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सोनू सूद आएंगे, मदद करेंगे कहकर सैकड़ों को फंसाया, रांची में राधास्वामी संगठन पर करोड़ों की ठगी का आरोप

Published: Sun, 13 Sep 2026 03:00 PM (IST)

रांची में राधास्वामी संगठन के 12 पदाधिकारियों के खिलाफ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने बताया ...और पढ़ें

सोनू सूद की मौजूदगी दिखाकर लोगों को योजनाओं में फंसाया गया।

सोनू सूद की मौजूदगी दिखाकर लोगों को योजनाओं में फंसाया गया।

HighLights

  1. राधास्वामी संगठन के 12 पदाधिकारियों पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप।

  2. सोनू सूद की मौजूदगी दिखाकर लोगों को योजनाओं में फंसाया गया।

  3. शिकायत के बाद जगन्नाथपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई।

जागरण संवाददाता, रांची। राधास्वामी संगठन की विभिन्न योजनाओं के नाम पर अनेक लाभुकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी, विश्वासघात और धनराशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। नामकुम निवासी डाॅ संतोष कुमार ने जगन्नाथपुर थाना में लिखित शिकायत देकर संगठन से जुड़े 12 पदाधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।

शिकायत के साथ लाभुकों की नामवार जमा राशि, योजना संबंधी पुस्तिका, फर्म व अन्य दस्तावेज और साक्ष्य भी संलग्न किए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार राधास्वामी संगठन का प्रदेश कार्यालय हटिया के कठहर कोचा स्थित देवी सदन से संचालित होता था।

संगठन के पदाधिकारियों की ओर से लोगों को 40 से 90 प्रतिशत छूट वाली ईएमआई योजना, कन्यादान योजना, करोड़पति योजना, एफएमसीजी योजना और छात्रवृत्ति योजना समेत कई योजनाओं की जानकारी दी जाती थी।

लोगों का विश्वास जीतने के लिए बालीवुड अभिनेता सोनू सूद की उपस्थिति और उनके वीडियो भी दिखाए जाते थे। संगठन से बड़े लोगों के जुड़े होने का हवाला देकर लाभुकों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनका पैसा सुरक्षित रहेगा।

लाभूकों को आरएसएबीएन निधि लिमिटेड बैंक का दिया जाता था पासबुक

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लाभुकों को आरएसएबीएन निधि लिमिटेड बैंक के नाम से पासबुक भी दी गई। वाहन योजना में बैंक से लिए गए वाहनों की निर्धारित ईएमआई संगठन की ओर से जमा कराने का भरोसा दिया गया।

इस आश्वासन के आधार पर लोगों से नकद, आनलाइन और बैंक ट्रांजेक्शन के माध्यम से आरएसओजी फूड्स कास्मेटिक प्रा लि के अलग-अलग बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा कराए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वाहन की ईएमआई का भुगतान बंद होने के बाद संगठन के जिला जोनल प्रभारी सह कार्यालय प्रभारी बिनू साहू से संपर्क किया गया।

उन्होंने लगातार यह आश्वासन दिया कि संगठन को केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की योजनाओं से राशि मिलती है और राशि मिलने के बाद सभी का भुगतान कर दिया जाएगा। शिकायत के अनुसार इसी तरह का आश्वासन संगठन के अन्य पदाधिकारियों की ओर से भी दिया गया।

दो माह पहले कार्यालय कर दिया गया बंद

प्राथमिकी में आरोप है कि करीब दो महीने पहले संगठन का प्रदेश कार्यालय बंद कर दिया गया। इसके बाद बिनू साहू कार्यालय में उपलब्ध नहीं हुए और फोन पर भी संपर्क से बचने लगे। पीड़ितों ने जब संगठन के दीपक कुमार शर्मा और अन्य पदाधिकारियों से रकम और ईएमआई के संबंध में बात की तो कथित तौर पर उनके साथ गाली गलौज और धमकी दी गई।

शिकायत में बिनू साहू, शकुंतला कुमारी, दीपक कुमार शर्मा, रश्मि कुमारी, दीपक शर्मा, अरुण कुमार प्रजापति, सतीश कुमार शर्मा, काजल श्रीवास्तव, मुकेश सिन्हा, अनीषा सिन्हा, जूली सिन्हा और गौरव श्रीवास्तव समेत 12 लोगों पर धोखाधड़ी, रकम हड़पने तथा रकम वापस मांगने पर धमकी और गाली गलौज करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।

करोड़ों की फर्जी बैंक गारंटी में करूर वैश्य बैंक ने एजुकेशन कंपनी पर कराया केस

करूर वैश्य बैंक की रांची शाखा के नाम पर फर्जी बैंक गारंटी तैयार कर सरकारी विभाग में प्रस्तुत करने का मामला सामने आया है। बैंक के शाखा प्रमुख सुनील तिवारी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज । मामले में एक एजुकेशन कंपनी और अन्य अधिकृत व्यक्तियों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाया गया है।

कार्रवाई के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। बैंक की शिकायत के अनुसार बैंक को एक पत्र मिला था। इसमें जारी बताई गई बैंक गारंटी की वैधता और प्रमाणिकता की पुष्टि करने को कहा गया था। शिकायत में बैंक गारंटी की राशि करोड़ों रुपये बताई गई है।

बैंक के पास इसकी प्रति भी भेजी गई थी। बैंक ने अपने रिकार्ड की जांच की तो पता चला कि ऐसी कोई बैंक गारंटी उसकी ओर से जारी ही नहीं की गई थी। गारंटी में बैंक अधिकारी के हस्ताक्षर, नाम और अन्य विवरण भी फर्जी पाए गए।

बैंक का आरोप है कि हिंदपीढ़ी थाना में आरोपितों के खिलाफ शिकायत देकर जांच और कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। इसके बाद बैंक की ओर से कई बार थाना का दौरा कर मामले को उठाया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।