विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

रांची की सड़कों पर रोज 4000 मालवाहक, ओवरलोडिंग की जांच महीने में सिर्फ 3-4 बार; हादसों का बढ़ रहा खतरा  

Published: Sat, 03 Oct 2026 08:08 AM (IST)

रांची में क्षमता से अधिक माल ढोने वाले वाहनों पर निगरानी कमजोर है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और बुनियादी ढांचे को ...और पढ़ें

रांची में ओवरलोड वाहनों पर निगरानी व्यवस्था कमजोर। (एआई जेनरेटेड इमेज)

रांची में ओवरलोड वाहनों पर निगरानी व्यवस्था कमजोर। (एआई जेनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. रांची में ओवरलोड वाहनों पर निगरानी व्यवस्था कमजोर।

  2. रोजाना 4000 वाहनों पर महीने में 3-4 जांच।

जागरण संवाददाता, रांची। रांची की सड़कों पर ओवरलोड वाहनों का परिचालन रोकने के लिए नियम और कार्रवाई की व्यवस्था है, लेकिन निगरानी की कमजोर व्यवस्था के कारण इसका असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा है। जिले की विभिन्न सड़कों से रोजाना करीब 4000 मालवाहक वाहन गुजरते हैं, लेकिन ओवरलोडिंग की जांच के लिए महीने में महज तीन-चार बार विशेष अभियान चलाया जाता है।

ऐसे में रोज गुजरने वाले हजारों वाहनों में से कितनों की जांच होती है, यह बड़ा सवाल है। नियमों के अनुसार ओवरलोड वाहन मिलने पर अतिरिक्त भार हटाए बिना उसे आगे नहीं बढ़ने दिया जाना चाहिए।

इसके बावजूद नियमित जांच के अभाव में क्षमता से अधिक माल लेकर वाहनों के परिचालन की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे जहां सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है, वहीं सड़क और पुल-पुलिया पर भी अतिरिक्त भार पड़ रहा है। लंबे समय तक ओवरलोड वाहनों के परिचालन से सड़क की उम्र प्रभावित होने के साथ सार्वजनिक ढांचे को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

नौ माह में 82 लाख जुर्माना, नियमित जांच से बढ़ सकता राजस्व

जनवरी से सितंबर 2026 तक ओवरलोडिंग के मामलों में करीब 82 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया है। ओवरलोडिंग पर 20 हजार रुपये जुर्माना और निर्धारित क्षमता से अधिक प्रत्येक टन भार पर दो हजार रुपये अतिरिक्त जुर्माने का प्रावधान है।

अतिरिक्त भार हटाए बिना वाहन को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।आंकड़े बताते हैं कि ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई से राजस्व प्राप्त हो रहा है, लेकिन नियमित जांच का दायरा बढ़ने पर कार्रवाई और राजस्व दोनों बढ़ सकते हैं।

4000 वाहनों के मुकाबले जांच बेहद सीमित

रांची जिले में रोजाना करीब 4000 मालवाहक वाहनों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद महीने में केवल तीन-चार बार विशेष जांच अभियान चलना निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।

प्रवेश मार्गों पर नियमित और प्रभावी चेकिंग नहीं होने से ओवरलोड वाहनों की पहचान शुरुआती स्तर पर नहीं हो पाती। यदि प्रवेश के समय ही वाहनों के वजन की जांच की जाए तो ओवरलोड वाहनों को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।

कंपनी की पर्ची में कम वजन, सड़क पर ज्यादा माल

ओवरलोडिंग की जांच में कांटा पर्ची महत्वपूर्ण दस्तावेज है। हालांकि वाहनों के पास फर्जी कांटा पर्ची होने की शिकायतें भी सामने आती हैं। माल लोड करने वाली कुछ कंपनियों द्वारा वास्तविक वजन से कम वजन दर्ज किए जाने की शिकायत भी है। ऐसे में सिर्फ कागजात देखकर वाहन को आगे बढ़ाने के बजाय जरूरत के अनुसार वास्तविक वजन की जांच जरूरी है।

सड़क-पुल पर दबाव, हादसे का भी खतरा

क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले भारी वाहनों से सड़क और पुल-पुलिया पर सामान्य से अधिक दबाव पड़ता है। इससे सड़क की संरचना प्रभावित होने के साथ पुल-पुलिया पर भी अतिरिक्त भार पड़ता है। वहीं भारी वाहन के नियंत्रण में दिक्कत आने पर दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए ओवरलोडिंग पर प्रभावी रोक सड़क सुरक्षा के साथ सार्वजनिक ढांचे की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।

जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार ने बताया कि अवैध ओवरलोडिंग को लेकर परिवहन कार्यालय की नजर बनी रहती है। ओवरलोडिंग पाए जाने पर जुर्माना वसूला जाता है और नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। 

यह भी पढ़ें- रांची में खेलगांव से टाटीसिल्वे तक सड़क पर मौत का खतरा, हादसों के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नहीं

यह भी पढ़ें- रांची में पानी की टेंशन खत्म! हटिया, गोंदा और गेतलसूद डैम लगभग फुल; अगली गर्मी में नहीं होगा संकट