रांची में छह दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी, बैंक मैनेजर ने बचाए 20 लाख रुपये
साइबर अपराधियों ने रांची के एक बुजुर्ग को मुंबई क्राइम ब्रांच का डीसीपी बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर 20.70 लाख ...और पढ़ें

मुंबई क्राइम ब्रांच का डीसीपी बनकर बुजुर्ग को धमकाया।
HighLights
साइबर ठगों ने मुंबई क्राइम ब्रांच डीसीपी बनकर धमकाया।
फर्जी एफआईआर भेज मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने का डर दिखाया।
बैंक मैनेजर की सूझबूझ से 20.70 लाख रुपये ठगी से बचे।
जागरण संवाददाता, रांची। साइबर अपराधियों ने रांची के एक बुजुर्ग को छह दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 20 लाख 70 हजार रुपये ठगने की कोशिश की। ठग ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का डीसीपी बताया और बुजुर्ग को उनके नाम पर दर्ज एक फर्जी प्राथमिकी भेजकर मनी लांड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी।
लगातार दबाव बनाने के बावजूद ठग अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सके। बैंक मैनेजर की सूझबूझ के कारण 20 लाख 70 हजार रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर होने से बच गए। चूना भट्ठा स्थित जयंती अपार्टमेंट में रहने वाले प्रदीप चक्रवर्ती ओरियंट इंश्योरेंस से सेवानिवृत्त हैं।
प्रदीप के अनुसार, रविवार को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का डीसीपी बताया। फोन करने वाले ने कहा कि मुंबई में उनके नाम से प्राथमिकी दर्ज हुई है और मनी लांड्रिंग के मामले में गिरफ्तार नरेश गोयल से उनका संबंध है।
ठग ने दावा किया कि नरेश गोयल ने प्रदीप को रुपये भेजे हैं और उनके बारे में पूरी जानकारी जांच एजेंसियों को दी है। ठग ने इसके बाद प्रदीप को डराने के लिए एक फर्जी एफआइआर भी भेजी।
उनसे कहा गया कि वह एक पत्र लिखकर दें कि वह नरेश गोयल को नहीं जानते हैं। इसके बाद भी साइबर अपराधी लगातार रुपये ट्रांसफर करने का दबाव बनाते रहे। इस दौरान प्रदीप को फोन पर लगातार निर्देश दिए जाते रहे और उन्हें मामले को किसी अन्य व्यक्ति से साझा नहीं करने के लिए भी दबाव बनाया गया।
20.70 लाख भेजने की हुई थी कोशिश
प्रदीप ने बताया कि साइबर अपराधी ने उन्हें एक बैंक खाते का नंबर भेजा और उसमें रुपये ट्रांसफर करने को कहा। उन्होंने मोबाइल के माध्यम से रुपये भेजने का प्रयास किया, लेकिन किसी कारण से रकम ट्रांसफर नहीं हो सकी। इसके बाद ठग ने उन्हें बैंक जाकर दूसरे खाते में रुपये भेजने का निर्देश दिया।
प्रदीप बैंक पहुंचे और बड़ी रकम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान पीएनबी के बैंक मैनेजर की नजर इतनी बड़ी रकम के एक साथ ट्रांसफर पर पड़ी। मैनेजर ने प्रदीप से रुपये भेजने का कारण पूछा।
बातचीत के दौरान उन्हें शक हुआ कि मामला साइबर ठगी से जुड़ा हो सकता है। बैंक मैनेजर ने तत्काल रुपये ट्रांसफर करने से रोक दिया। इस तरह 20 लाख 70 हजार रुपये साइबर अपराधियों के हाथ में जाने से बच गए।
स्कैनर भेजकर भी बनाया दबाव
ठगों ने प्रदीप को भरोसा दिलाने और अपने जाल में फंसाए रखने के लिए अर्जुन गोराई के नाम से एक स्कैनर भी भेजा था। साइबर अपराधियों ने इस पूरे घटनाक्रम को आधिकारिक कार्रवाई का रूप देने की कोशिश की। छह दिनों तक फोन पर अलग अलग तरीके से दबाव बनाए जाने के कारण प्रदीप मानसिक रूप से परेशान रहे।
साइबर थाने पहुंचे, प्राथमिकी दर्ज नहीं होने का दावा
रकम बचने के बाद प्रदीप साइबर थाना पहुंचे। उनका कहना है कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी, लेकिन उनकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। प्रदीप के अनुसार, उन्हें बताया गया कि यदि दस लाख रुपये से अधिक की रकम चली जाती तो प्राथमिकी दर्ज की जाती। इसके बाद उन्हें वापस भेज दिया गया।
डिजिटल अरेस्ट में फंसाने का नया तरीका
साइबर अपराधी अब लोगों को पुलिस, सीबीआइ, क्राइम ब्रांच या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन कर रहे हैं। इसके बाद पीड़ित को बताया जाता है कि उसके नाम से कोई आपराधिक मामला दर्ज है। फर्जी एफआइआर, वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी की वर्दी और लगातार निगरानी का दिखावा कर पीड़ित को डराया जाता है।
इसके बाद बैंक खाते की जांच या मनी लांड्रिंग से बचाने के नाम पर रुपये ट्रांसफर करने को कहा जाता है। इस मामले में भी अपराधियों ने पहले डर पैदा किया, फिर फर्जी दस्तावेज भेजकर भरोसा बनाने की कोशिश की।
डिजिटल अरेस्ट से बचाव के उपाय
- पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी फोन पर रुपये ट्रांसफर करने का आदेश नहीं देता। ऐसा फोन आए तो तत्काल फोन काट दें।
- फर्जी एफआईआर, नोटिस या वीडियो कॉल देखकर घबराएं नहीं। संबंधित थाना या जांच एजेंसी के आधिकारिक नंबर से खुद सत्यापन करें।
- किसी अनजान व्यक्ति के बताए खाते में कभी भी रकम ट्रांसफर न करें, चाहे वह कितनी भी बड़ी कार्रवाई या गिरफ्तारी का डर क्यों न दिखाए।
- वीडियो काल पर वर्दी पहने व्यक्ति को देखकर उसे पुलिस अधिकारी न मानें। साइबर अपराधी फर्जी पहचान और वीडियो काल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- यदि रुपये चले गए हैं या ठगी का प्रयास हुआ है तो तुरंत 1930 पर शिकायत करें और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराएं। बैंक को भी तत्काल सूचना दें।
