रांची में चलेगा 'फैटी लीवर मुक्त' अभियान: 500 मोबाइल वाहन, 1000 हेल्थ वर्कर लगेंगे; डेढ़ लाख लोगों की जांच
रांची में 'फैटी लीवर मुक्त रांची' अभियान सितंबर के अंत तक शुरू होगा, जिसका लक्ष्य एक वर्ष में 1.20 लाख ...और पढ़ें

शुरू होगा ‘फैटी लीवर मुक्त रांची’ अभियान, 500 स्थानों पर पहुंचेंगे मोबाइल चिकित्सा वाहन।
HighLights
सितंबर अंत तक 'फैटी लीवर मुक्त रांची' अभियान शुरू होगा।
एक वर्ष में 1.20 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य।
500 स्थानों पर मोबाइल वाहन, 1000 स्वास्थ्यकर्मी होंगे प्रशिक्षित।
जागरण संवाददाता, रांची। बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों में बदलाव और शारीरिक गतिविधियों में कमी के बीच फैटी लीवर तेजी से चिंता का विषय बन रहा है। खास बात यह है कि शुरुआती दौर में इस बीमारी के लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है और लिवर में वसा जमा होती रहती है।
समय पर पहचान और सावधानी नहीं बरती गई तो यही स्थिति आगे चलकर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इसी चुनौती को देखते हुए रांची में देश का पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ‘फैटी लीवर मुक्त रांची’ अभियान शुरू किया जा रहा है।
अभियान की शुरुआत सितंबर के अंत तक होने की संभावना है। एक वर्ष में करीब 1.20 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य रखा गया है। बुधवार को सदर अस्पताल में आयोजित प्रेस वार्ता में रक्षा राज्य मंत्री सह रांची सांसद संजय सेठ ने इसकी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं। अभियान का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि लोगों को इसके कारणों और बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना भी है।
500 जगहों तक पहुंचेगी जांच की सुविधा
अभियान सदर अस्पताल रांची और नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट आफ लिवर एंड बाइलियरी साइंसेज के सहयोग से चलाया जाएगा। डा. एसके सरीन के मार्गदर्शन में अत्याधुनिक जांच सुविधाओं से लैस चार विशेष मोबाइल चिकित्सा वाहन लगाए जाएंगे।
दो वाहन रांची पहुंच चुके हैं, जबकि दो अन्य जल्द उपलब्ध होंगे। ये वाहन जिले के करीब 500 चिन्हित स्थानों पर पहुंचकर लोगों की जांच करेंगे। आशा और एएनएम के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर लोगों की पहचान की जाएगी।
एबीसीडी जोखिम स्कोर के माध्यम से अधिक जोखिम वाले लोगों को चिह्नित किया जाएगा। जरूरत के अनुसार उन्हें आगे की जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और उपचार के लिए भेजा जाएगा। जिले के सभी प्रखंडों और अनुमंडलीय अस्पतालों में करीब 1000 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
क्या है फैटी लीवर और क्यों है चिंता
फैटी लीवर में लिवर की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक वसा जमा होने लगती है। यह शराब के सेवन से भी हो सकता है और बिना शराब के सेवन के भी। मोटापा, मधुमेह, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खान-पान और अत्यधिक कैलोरी वाले भोजन इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। शुरुआत में अधिकतर मरीजों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता।
कुछ लोगों को लगातार थकान, कमजोरी या पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में भारीपन अथवा असहजता महसूस हो सकती है। बीमारी बढ़ने पर लिवर में सूजन और क्षति हो सकती है तथा गंभीर मामलों में लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है।
इलाज से पहले जरूरी है जीवनशैली में बदलाव
फैटी लीवर से बचाव में नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन को नियंत्रित रखना, संतुलित भोजन और शराब से परहेज महत्वपूर्ण है। मीठे पेय, अत्यधिक तला-भुना और अधिक कैलोरी वाले भोजन का सेवन कम करना भी जरूरी है।
शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर चिकित्सकीय सलाह के साथ जीवनशैली में बदलाव से बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। अभियान में 100 से अधिक स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को भी जोड़ा जाएगा। इनके माध्यम से स्वस्थ खान-पान और बेहतर जीवनशैली का संदेश युवाओं तक पहुंचाया जाएगा।
1.10 करोड़ की मशीन, 40 हजार का वाहन
अभियान के लिए करीब 1.10 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक जांच मशीन उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा करीब 40 हजार रुपये की लागत से एक वाहन उपलब्ध कराया गया है।
सिविल सर्जन डाॅ. अमरेंद्र प्रसाद ने कहा कि शुरुआती अवस्था में फैटी लीवर की पहचान होने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।
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