रांची, [जागरण स्‍पेशल ]। किसी और ने नहीं, खून के रिश्‍ते ने ऐसी दगाबाजी की है। धोखेबाज बेटे ने दुखियारी मां से पहले उसका 'घरौंदा' छीन लिया और फिर दर-दर की ठोकरें खाने के लिए फुटपाथ पर छोड़ गया।  मां के नाम वाले फ्लैट पर कब्‍जा जमाने के लिए बेटे ने बहू के साथ मिलकर तमाम षड्यंत्र रचे हैं। हालांकि मां ने महिला आयोग की शरण ली, लेकिन न्‍याय मिलने के बाद भी बेटे-बहू उसे फ्लैट देने को राजी नहीं हुए।

थक-हार कर लाचार मां ने अदालत में याचिका दाखिल की है, जहां से उसके हक में आदेश आने के बावजूद अब तक वह सड़क पर ही दिन काटने को विवश है। इस बीच कोर्ट ने बेटे द्वारा अपनी मां को घर नहीं सौंपने को गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए अपर न्यायायुक्त एसके शशि की अदालत ने आरोपित  रवि कुमार के साथ राज्य आवास बोर्ड को भी पक्षकार बनाने का आदेश दिया है।

मालूम हो कि अरगोड़ा हाउसिंग कॉलोनी में फ्लैट संख्या 62 में रह रही वीणापाणि सिन्हा को उसके बेटे रवि एवं बहु निशा रानी ने घर से निकाल दिया। जबकि फ्लैट उसी के नाम पर है। वीणापाणि सिन्हा ने 29 अप्रैल 2012 को राज्य महिला आयोग में इसकी शिकायत की। 29 दिसंबर को महिला आयोग ने फैसला सुनाते हुए फ्लैट वृद्धा को सौंपने का आदेश दिया। लेकिन आरोपित ने आयोग के आदेश का पालन नहीं किया।

इसके बाद वृद्धा वीणापाणि सिन्हा अदालत की शरण में पहुंची। अदालत ने भी बेटे-बहु को फ्लैट अपने मां को सौंपने का आदेश दिया। आवास बोर्ड को फ्लैट खाली कराने का आदेश दिया। इसका अनुपालन नहीं किया गया। अदालत ने आवास बोर्ड को लापरवाही बरतने का आरोपी बनाने का आदेश दिया है। 

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Posted By: Alok Shahi