विवेक आर्यन, रांची :

राजधानी रांची के छोटानागपुर लॉ कॉलेज में हर साल 230 छात्र एडमिशन लेते हैं। इसके अलावा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की 100 सीटों पर भी रांची के करीब 10 छात्र एडमिशन लेते हैं। रांची और आसपास के जिलों में लॉ करियर का ऑप्शन होने की वजह से युवाओं में इसका क्रेज बढ़ा है। खास बात यह है कि इनमें से आधी संख्या लड़कियों की है। जबकि आज से कुछ सालों पहले तक लॉ कॉलेजों की सीटें कम होने के बावजूद खाली रह जाती थीं। अब लॉ करने वाले छात्र-छात्राओं के पास कोर्ट जाने के अलावा भी दर्जनों विकल्प है। देश-विदेश की हजारों कॉरपोरेट कंपनियां लीगल एडवाइजर के रूप में आपको काम देने को तैयार हैं। बैंकिंग में भी लॉ के वृहद स्कोप हैं। लॉ कॉलेजों में अध्यापन भी लॉ के विद्यार्थियों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। सेवा भाव से चल रहे एनजीओ को भी लॉ के जानकारों की जरूरत होती है। इन सबके अलावा प्राइवेट प्रैक्टिस का सुरक्षित विकल्प भी मौजूद है।

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हर साल 300 से ज्यादा लॉ ग्रेजुएट हो रहे हैं तैयार

रांची में लॉ की पढ़ाई मुख्य रूप से दो संस्थानों में होती है। नेशनल लॉ विवि में जहां पांच वर्षो का बीए एलएलबी कोर्स है, वहीं छोटानागपुर लॉ कॉलेज आपको तीन वर्षो के ग्रेजुएशन के साथ पीजी कोर्स की भी सुविधा देता है। दोनों संस्थानों से प्रतिवर्ष कुल 300 से अधिक विद्यार्थी लॉ ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट होते हैं। इनमें से कुछ लोग अन्य राज्यों में जा कर लीगल प्रैक्टिस करते हैं, वहीं कई ऐसे भी हैं जो इसी राज्य में रह कर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवा देते हैं।

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अगले सत्र से छोटानागपुर लॉ कॉलेज में पांच वर्षीय कोर्स भी संभावित -

छोटानागपुर लॉ कॉलेज में अगले सत्र से पांच वर्ष का बीएएलएबी कोर्स शुरू हो सकता है। कॉलेज की ओर से रांची विवि को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। कॉलेज के प्राचार्य पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि बार काउंसिल के निरीक्षण के बाद कोर्स शुरू किया जा सकेगा। मई में काउंसिल द्वारा निरीक्षण किया जाना है। पांच वर्षो के कोर्स के लिए 120 सीटें होंगी। अभी ग्रेजुएशन में 200 और पोस्ट ग्रेजुएशन में 30 सीटों पर नामांकन होता है। ------------------------

महिलाओं के हक की लड़ाई के लिए हो रही हैं तैयार -

लॉ कर रहे लोगों में आधी संख्या छात्राओं की है। छात्राएं अपने अधिकार को ले कर सजग हैं और खुद को उसी अनुरूप तैयार कर रही हैं। छोटानागपुर कॉलेज के फ‌र्स्ट इयर की छात्रा नेहा बताती हैं कि राज्य में महिलाओं के अधिकार को लेकर बहुत कम लोगों को पता है। कई बार जागरूकता की कमी से वे असामाजिक अन्याय का शिकार हो जाती हैं। नेहा के साथ रूपा, सोनम और मृणालिनी महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए काम करेंगी। वे मानती हैं कि समाज में बराबर का दर्जा पाने के लिए महिलाओं को कानून पढ़ना होगा।

Posted By: Jagran

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