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रामगढ़ के चितरपुर में मिले अंश और अंशिका, 2 जनवरी को रांची से किए गए थे अगवा, दो गिरफ्तार

By Kanchan SinghEdited By: Kanchan Singh
Published: Wed, 14 Jan 2026 09:53 AM (IST)Updated: Wed, 14 Jan 2026 10:44 AM (IST)

रांची पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। धुर्वा से 13 दिन पहले लापता हुए दो भाई-बहन अंश और अंशिका को ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, रांची। रांची पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। धुर्वा से लापता हुए दोनों बच्चे को सकुशल रामगढ़ के चितरपुर से बरामद कर लिया गया है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। दोनों औरंगाबाद बिहार के रहने वाले हैं।

एसएसपी राकेश रंजन के नेतृत्व में रांची  पुलिस की टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है।  पिछले 13 दिनों से लापता हुए दो भाई बहन अंश और अंशिका को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है।

दोनों बच्चे को रांची पुलिस की विशेष टीम ने रामगढ़ जिले के चितरपुर से बरामद किया है। साथ ही  पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। इनका सुराग देने वालों के लिए पुलिस ने चार लाख रुपये इनाम घोषित कर रखा था

पुलिस ने पोस्टर जारी कर वाहनों के जरिए शुरू किया था प्रचार-प्रसार

पुलिस ने अंश और अशिंका की तस्वीरों के साथ पोस्टर भी जारी किया था। यह पोस्टर शहर के कई चौक-चौराहों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए।

इसके अलावा पुलिस वाहन पर भी पोस्टर लगाकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। अधिकारी से लेकर जवान तक अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर बच्चों का पोस्टर लगाकर प्रचार प्रसार कर रहे थे और लोगों से मदद की अपील कर रहे हैं।

अपहरण के दिन दो जनवरी को शालीमार बाजार में सैकड़ों वाहन पहुंचे थे। पुलिस ने वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालते हुए सभी वाहनों के नंबर निकाले। इसके बाद एक-एक वाहन का विवरण जुटाकर पुलिस संबंधित पते पर जाकर सत्यापन किया।

घटनास्थल शालीमार बाजार में कई जिलों से पहुंचते हैं कारोबारी

शालीमार बाजार के दिन यहां सैकड़ों दुकानदार और खरीददार दूसरे जिलों से पहुंचते हैं। इनमें मुख्य रूप से लोहरदगा, गुमला, खूंटी, कर्रा, बुढमू, मांडर समेत अन्य इलाकों से कारोबारी और खरीददार आते हैं।

बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के कारण पुलिस हर पहलू से जांच करती रही। शालीमार बाजार में कुछ लोग बैठकर शराब का सेवन करते हैं और कई तरह की गतिविधियां भी चलती रहती हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस यह भी जांच कर रही थी कि कहीं बाहर से आए कारोबारी या दुकानदार तो बच्चों को उठाकर नहीं ले गए हैं।