सीएम का पुतला दहन में JPSC-JSSC रिफाॅर्म मंच के छात्रों को राहत, महिला विधायक के खिलाफ पोस्ट करनेवाले को भी जमानत
रांची में मुख्यमंत्री का पुतला दहन मामले में जेपीएससी-जेएसएससी रिफाॅर्म मंच के चार सदस्यों को अग्रिम जमानत मिली। वहीं, सुप्रीम ...और पढ़ें

JPSC-JSSC रिफाॅर्म मंच के छात्रों और FB पोस्ट मामले के आरोपी को मिली राहत, अदालत से मिली जमानत।
HighLights
जेपीएससी-जेएसएससी मंच के चार सदस्यों को रांची में अग्रिम जमानत मिली।
मुख्यमंत्री का पुतला दहन मामले में पुलिस से झड़प के आरोप थे।
सुप्रीम कोर्ट ने महिला विधायक के खिलाफ फेसबुक पोस्ट आरोपी को जमानत दी।
राज्य ब्यूरो, रांची। जेपीएससी-जेएसएससी रिफाॅर्म मंच के बैनर तले मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हुई झड़प के मामले में चंडी तिवारी, पीयूष कुमार सिंह उर्फ पीयूष, रवींद्र कुमार पासवान और जय शंकर कुमार उर्फ जैराज को अदालत से जमानत मिल गई।
अपर न्यायायुक्त अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने बुधवार को तीनों की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद राहत प्रदान की।इनकी ओर से अधिवक्ता सूरज किशोर प्रसाद ने पक्ष रखा। मामला रांची कोतवाली थाना से जुड़ा है।
इन चारों के साथ अन्य पर 22 अगस्त को हत्या के प्रयास, गैरकानूनी जमाव, बलपूर्वक कार्रवाई, जानबूझकर चोट पहुंचाने के गंभीर मामले, लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने समेत अन्य आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत केस दर्ज है।
महिला विधायक के खिलाफ FB पोस्ट करनेवाले को सुप्रीम कोर्ट से जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की एक महिला विधायक के खिलाफ फेसबुक पोस्ट और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले के आरोपित सहदेव उरांव जमानत प्रदान की है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के 17 अप्रैल 2026 के उस आदेश को रद किया, जिसमें जमानत देने से इन्कार किया गया था। आरोपित के खिलाफ साइबर थाना में मामला दर्ज किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी.वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अपीलकर्ता पहले सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करता था। उस पर फेसबुक पोस्ट और कमेंट के जरिए एक महिला विधायक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
वह एक वर्ष से अधिक समय तक हिरासत में रह चुका है और मुकदमे की सुनवाई भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में उसको लगातार हिरासत अब जरूरी नहीं है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपित को अधिकतम तीन वर्ष की सजा हो सकती है।
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को अस्वीकार करते हुए अपीलकर्ता को नियमित जमानत देने का आदेश दिया। जमानत उन शर्तों के अधीन होगी, जो संबंधित ट्रायल कोर्ट तय करेगा। हाई कोर्ट ने 17 अप्रैल को इसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
इस पर आरोप था कि याचिकाकर्ता ने एक महिला राजनेता को निशाना बनाने के लिए एक नकली डिजिटल पहचान का इस्तेमाल किया, जो कि एक मौजूदा विधायक हैं। गाली-गलौज और लिंग-आधारित हमले करने के लिए जानबूझकर अपनी पहचान छिपाई थी।
