विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दिल्ली-मुंबई से लेकर विदेश तक चमकेगा झारखंड का उत्पाद, रांची एयरपोर्ट पर तैयार हो रहा एयर कार्गो गेटवे

Published: Sat, 12 Sep 2026 06:39 PM (IST)

रांची एयरपोर्ट अब झारखंड के उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए एक बड़े एयर कार्गो गेटवे के रूप में विकसित हो रहा है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. रांची एयरपोर्ट झारखंड के उत्पादों के लिए एयर कार्गो गेटवे बनेगा।

  2. किसानों, फार्मा और उद्योगों को मिलेगी तेज लॉजिस्टिक्स व कोल्ड-चेन सुविधा।

  3. कार्गो टर्मिनल ने 2024 से 20 हजार मीट्रिक टन से अधिक माल संभाला।

अमित सिंह, रांची। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट अब सिर्फ यात्रियों की आवाजाही का केंद्र नहीं, बल्कि झारखंड के उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचाने का बड़ा माध्यम बनने की दिशा में बढ़ रहा है।

रांची एयरपोर्ट पर कार्गो सेवा के विस्तार योजना पर काम शुरू हो गया है। रांची एयरपोर्ट पर कार्गो सेवा के विस्तार का सबसे बड़ा फायदा किसानों और कृषि उत्पाद कारोबारियों को मिल सकता है।

झारखंड की सब्जियां, फल, फूल, दवाएं और औद्योगिक उत्पाद देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचें, यही कार्गो विस्तार का सबसे बड़ा अवसर बन सकता है।

झारखंड में सब्जी, फल, फूल, मछली सहित कई ऐसे उत्पाद हैं, जिन्हें लंबी दूरी तक पहुंचाने में समय महत्वपूर्ण होता है। कोल्ड-चेन और एयर कार्गो की सुविधा मिलने पर इन उत्पादों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े बाजारों तक कम समय में पहुंचाया जा सकेगा।

इससे किसान केवल स्थानीय मंडियों पर निर्भर रहने के बजाय दूर के बाजारों में बेहतर कीमत तलाश सकेंगे। आगे चलकर निर्यात की सुविधा विकसित होने पर झारखंड के चुनिंदा कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का रास्ता भी खुल सकता है।

वर्ष 2024 में कार्गो टर्मिनल का संचालन शुरू होने के बाद यहां कारोबार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। एयर इंडिया सैट्स (एआईएसएटीएस) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में रांची एयर कार्गो टर्मिनल से 7,992 मीट्रिक टन कार्गो हैंडल किया।

यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब नौ प्रतिशत अधिक है। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी कार्गो वॉल्यूम में करीब 10 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा है।

2024 में संचालन शुरू होने के बाद रांची टर्मिनल से अब तक 20 हजार मीट्रिक टन से अधिक कार्गो हैंडल किया जा चुका है।

टर्मिनल से आगे अब पूरा नेटवर्क बनाने की तैयारी

कार्गो कारोबार बढ़ने के साथ रांची को सिर्फ माल चढ़ाने-उतारने वाला टर्मिनल बनाने के बजाय एयर कार्गो गेटवे के रूप में विकसित करने की संभावना बढ़ी है।

इसके लिए कार्गो टर्मिनल के साथ कोल्ड स्टोरेज, प्री-कूलिंग, पैकेजिंग, ग्रेडिंग, वेयरहाउस और तेज सड़क कनेक्टिविटी जैसी सुविधाओं का नेटवर्क तैयार करना अहम होगा। एआईएसएटीए देश के दूसरे एयरपोर्ट पर एयर फ्रेट टर्मिनल और तापमान नियंत्रित कार्गो सुविधाएं संचालित करती है।

फार्मा और मेडिकल कार्गो के लिए भी अवसर

रांची को फार्मा कार्गो का केंद्र बनाने की भी संभावना है। तापमान नियंत्रित स्टोरेज और तेज हैंडलिंग की सुविधा विकसित होने पर दवाएं, वैक्सीन, मेडिकल उपकरण और अन्य संवेदनशील उत्पादों की आवाजाही आसान होगी। एआईएसएटीएस ने रांची में फार्मास्यूटिकल्स, पेरिशेबल और मशीनरी जैसे कार्गो को संभालने की क्षमता पहले ही बताई है।

ई-कामर्स से बढ़ेगा छोटा कार्गो

ऑनलाइन कारोबार बढ़ने के साथ छोटे पार्सल और हाई-वैल्यू सामान के लिए एयर कार्गो की मांग बढ़ रही है। रांची में ई-कामर्स कंपनियों के लिए अलग प्रोसेसिंग और डिस्पैच सुविधा विकसित होती है तो झारखंड के छोटे कारोबारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। स्थानीय उत्पाद सीधे देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जा सकेंगे।

उद्योगों को मिलेगा तेज लाजिस्टिक विकल्प

झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी एयर कार्गो महत्वपूर्ण है। मशीनों के जरूरी स्पेयर पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, महंगे कलपुर्जे और तत्काल जरूरत की औद्योगिक सामग्री को हवाई मार्ग से तेजी से भेजा जा सकता है। इससे मशीन खराब होने पर उत्पादन रुकने की अवधि कम करने में मदद मिलेगी।

कार्गो से जुड़े सभी पक्ष एक मंच पर

रांची में गत माह आयोजित एयर कार्गो एवं लाजिस्टिक्स समिट में एयरलाइंस, एयरपोर्ट, कार्गो एजेंट, फ्रेट फारवर्डर, कारोबारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रांची को उभरते कार्गो गेटवे के रूप में विकसित करने की योजना बनी थी। करीब 70 प्रतिनिधियों की भागीदारी इस क्षेत्र में बढ़ती रुचि को दर्शाती है।

यह भी पढ़ें- झारखंड में गिरिडीह बना छोटे कारोबार का गढ़, 3.20 लाख कामगारों को मिला रोजगार

रांची एयरपोर्ट पर कई विकास कार्य चल रहे हैं। भविष्य में रांची एयरपोर्ट प्रदेश के सबसे बेहतर कार्गो हब के रूप में जाना जाएगा, क्योंकि इसके कार्गो विस्तार योजना पर काम शुरू हो गया है। हालांकि, राज्य सरकार एयरपोर्ट प्रबंधन को जमीन उपलब्ध नहीं करा रही है, जिस वजह से कई विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है।

-

संजय सेठ, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री