रांची एयरपोर्ट के पास जमीन पर सेना का दावा, हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से पूछा- किस आधार पर है स्वामित्व?
रांची एयरपोर्ट के पास जमीन विवाद पर हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है। अदालत ने विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से मांगा जमीन का आधार।
सेना को कोर्ट की अनुमति बिना निर्माण से रोका।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में रांची एयरपोर्ट के समीप खाली जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में रक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है। अदालत ने रक्षा मंत्रालय से पूछा है कि विवादित जमीन पर उसका दावा किस आधार पर है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि जमीन पर दावे से संबंधित कोई अधिसूचना या दस्तावेज रक्षा मंत्रालय के पास है, तो उसे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। अदालत ने विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, जमीन पर किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाए। यदि सेना उक्त जमीन पर किसी तरह का निर्माण करना चाहती है, तो उसे इसके लिए पहले हाई कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।
मामले में नीलिमा प्रसाद ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत को बताया कि रांची एयरपोर्ट के पास स्थित विवादित जमीन प्रार्थी की है। उनके पास जमीन का वैध सेल डीड है। जमीन का म्यूटेशन भी हो चुका है और उसका अद्यतन लगान रसीद भी उपलब्ध है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसके पास दस्तावेज होने के बाद भी सेना ने उक्त जमीन पर अपना दावा करते हुए सेना की जमीन का बोर्ड लगा दिया है। इसके कारण उन्हें अपनी ही जमीन पर जाने में परेशानी हो रही है।
प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि जमीन पर रक्षा मंत्रालय या सेना का स्वामित्व है, तो उसके समर्थन में कोई सरकारी अधिसूचना या अन्य वैध दस्तावेज अवश्य होना चाहिए। इसलिए रक्षा मंत्रालय से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।
