रांची एयरपोर्ट पर घटे विमान तो पार्किंग से कैंटीन तक कारोबार पर असर, फिर भी तीन साल में 38 करोड़ बढ़ा मुनाफा
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उड़ानों और यात्रियों की कमी से कारोबार पर दबाव है, लेकिन पिछले दो वर्षों में शुद्ध ...और पढ़ें

बिरसा मुंडा एयरपोर्ट की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 87.56 करोड़ का शुद्ध मुनाफा।
पिछले दो वर्षों में शुद्ध मुनाफे में 38 करोड़ की वृद्धि।
अमित सिंह, रांची। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर विमानों की संख्या और यात्रियों की आवाजाही में कमी का असर अब टर्मिनल के भीतर और बाहर कारोबार पर दिखने लगा है। पार्किंग संचालक से लेकर कैंटीन और टैक्सी संचालक तक कम कारोबार की चिंता जता रहे हैं।
यात्रियों की संख्या में कमी का मतलब केवल कम भीड़ नहीं है, बल्कि हर दिन एयरपोर्ट से जुड़े कई छोटे-बड़े कारोबार में होने वाली कमाई पर भी इसका असर पड़ता है। हालांकि, इस तस्वीर का दूसरा पहलू राहत देने वाला है। रांची एयरपोर्ट का वित्तीय प्रदर्शन पिछले वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है।
वित्तीयवर्ष 2025-26 में एयरपोर्ट ने करीब 27 लाख यात्रियों को संभाला और 87.56 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। वर्ष 2024-25 में यह मुनाफा 64.60 करोड़ और 2023-24 में 49.21 करोड़ था। यानी दो वर्षों में शुद्ध मुनाफे में करीब 38 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि मौजूदा कारोबारी दबाव के बावजूद एयरपोर्ट की वित्तीय नींव मजबूत है।
कम उड़ान का असर सिर्फ रनवे तक सीमित नहीं
एयरपोर्ट का पूरा आर्थिक तंत्र यात्रियों और विमानों की आवाजाही से जुड़ा है। एक यात्री के एयरपोर्ट पहुंचने के साथ पार्किंग, कैब, खान-पान, रिटेल और दूसरी सेवाओं में खर्च की संभावना बनती है। इसलिए यात्रियों की संख्या घटने पर सबसे पहले उन्हीं कारोबारियों की आय प्रभावित होती है, जिनका कारोबार सीधे फुटफाल पर निर्भर है।
पार्किंग में वाहन कम आएंगे, तो शुल्क से होने वाली आय घटेगी। कैंटीन और फूड आउटलेट में ग्राहक कम होंगे, तो बिक्री पर असर पड़ेगा। टैक्सी और कैब संचालकों के फेरे घट सकते हैं। एयरपोर्ट की दुकानों में फुटफॉल कम होने से बिक्री प्रभावित होगी। लंबे समय तक यही स्थिति रही तो विज्ञापन और अन्य गैर-एयरोनॉटिकल कारोबार पर भी दबाव आ सकता है।
एयरलाइंस के लिए भी यात्री सबसे बड़ा संकेत
विमानों की संख्या घटने का असर इससे भी आगे जाता है। एयरलाइंस किसी रूट पर उपलब्ध सीट, यात्री मांग और सीट भरने की स्थिति के आधार पर अपनी उड़ान योजना तैयार करती हैं। यदि किसी रूट पर लगातार कम यात्री मिलते हैं, तो उड़ानों की संख्या घटाने या विमान को दूसरे रूट पर लगाने का निर्णय लिया जा सकता है।
इससे रांची के यात्रियों के सामने विकल्प कम होने का खतरा रहता है। दूसरी ओर नई उड़ानों और बेहतर कनेक्टिविटी से यात्रियों की संख्या बढ़ती है तो एयरलाइंस के लिए भी रूट अधिक आकर्षक बनते हैं। इसलिए आने वाले समय में उड़ानों की संख्या और सीट क्षमता बढ़ाना रांची एयरपोर्ट के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
दस साल में यात्री चार गुना से ज्यादा
मौजूदा दबाव के बावजूद रांची एयरपोर्ट की लंबी अवधि की तस्वीर मजबूत है। वर्ष 2014-15 में एयरपोर्ट से करीब 6.5 लाख यात्री आते-जाते थे। 2025-26 में यह आंकड़ा करीब 27 लाख पहुंच गया। यानी करीब एक दशक में यात्री आधार में लगभग 20.5 लाख की बढ़ोतरी हुई।
यही बढ़ता यात्री आधार एयरपोर्ट के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। मौजूदा कमी को इसी बड़े परिदृश्य में देखने की जरूरत है। यदि कनेक्टिविटी और उड़ानों में फिर विस्तार होता है तो रांची एयरपोर्ट के पास यात्रियों की संख्या बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश है।
विस्तार से बढ़ेगा कारोबार का दायरा
एयरपोर्ट की विस्तार योजनाएं इस तस्वीर को और सकारात्मक बनाती हैं। टर्मिनल में अतिरिक्त जगह, सिक्योरिटी होल्ड एरिया और पीक आवर में ज्यादा यात्रियों को संभालने की क्षमता बढ़ाने की तैयारी है। इसका सीधा फायदा यात्रियों के साथ एयरपोर्ट के कारोबार को भी मिलेगा।
अधिक क्षमता का मतलब अधिक यात्री संभालने की गुंजाइश। अधिक यात्री का मतलब पार्किंग, कैब, फूड, रिटेल और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बड़ा बाजार। यानी आज जिस पार्किंग और कैंटीन कारोबार पर दबाव है, वही क्षेत्र कनेक्टिविटी सुधरने के साथ फिर तेजी पकड़ सकते हैं।
यात्रियों को सुविधा, मगर बढ़ सकता है दबाव
मौजूदा स्थिति का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि कम भीड़ से यात्रियों को चेक-इन, सुरक्षा जांच, बोर्डिंग और टर्मिनल में आवाजाही में आसानी मिल सकती है।
एयरपोर्ट के मौजूदा संसाधनों पर भी दबाव कम रहता है। लेकिन यह लाभ तभी स्थायी सकारात्मकता में बदलेगा, जब कम यात्री संख्या अस्थायी रहे। लंबे समय तक उड़ानों और यात्रियों की कमी बनी रही, तो एयरपोर्ट से जुड़े कारोबार और राजस्व वृद्धि पर दबाव बढ़ सकता है।
तीन साल में लगातार बढ़ी कमाई
| वित्तीय वर्ष | शुद्ध मुनाफा |
|---|---|
| 2023-24 | ₹49.21 करोड़ |
| 2024-25 | ₹64.60 करोड़ |
| 2025-26 | ₹87.56 करोड़ |
| दो वर्षों में बढ़ोतरी | ₹38.35 करोड़ |
10 साल में यात्री आधार में बड़ी छलांग
| वित्तीय वर्ष | यात्री संख्या |
|---|---|
| 2014-15 | करीब 6.5 लाख |
| 2025-26 | करीब 27 लाख |
| बढ़ोतरी | करीब 20.5 लाख यात्री |
कारोबार पर कहां-कहां असर?
पार्किंग : वाहन कम आने से शुल्क आय प्रभावित।
कैंटीन/फूड : ग्राहक कम होने से बिक्री घटेगी।
टैक्सी-कैब : यात्रियों की आवाजाही कम होने से फेरे घटेंगे।
रिटेल : फुटफाल घटने से बिक्री पर दबाव।
विज्ञापन : कम फुटफाल से व्यावसायिक आकर्षण प्रभावित हो सकता है।
एयरलाइंस : कम मांग पर रूट और उड़ानों की समीक्षा संभव।
एयरपोर्ट राजस्व : विमान संचालन और गैर-एयरोनॉटिकल गतिविधियों की वृद्धि पर असर।
क्या कहते है विशेषज्ञ?
रांची एयरपोर्ट के सामने फिलहाल चुनौती कारोबार बचाने से ज्यादा उसकी अगली वृद्धि की है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, बड़ा यात्री आधार और प्रस्तावित विस्तार तीन ऐसे आधार हैं, जो मौजूदा दबाव के बावजूद भविष्य की तस्वीर को सकारात्मक बनाते हैं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि नए रूट, बेहतर समय-सारिणी और पर्याप्त सीट क्षमता के जरिए रांची की हवाई मांग को फिर उड़ान मिले।
-एवी कृष्णा, पूर्व निदेशक, रांची एयरपोर्ट
