जागरण संवाददाता, रांची :

रमजान उल मुबारक महीने का पहला अशरा (रहमत का अशरा) 16 मई गुरुवार की शाम को खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही गुरुवार की मगरिब की नमाज के बाद से रमजान का दूसरा अशरा (मगफिरत का अशरा) शुरू हो जाएगा। यह अशरा 26 मई तक रहेगा। मौलाना तलहा नदवी ने बताया कि रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत का है। इसमें अल्लाह बंदों के रोजे, इफ्तार, सेहरी, नमाज ए तरावीह और दूसरे नेक कामों को कबूल करता है। इन नेक कामों की वजह से गुनाहगारों की बख्शता है। यह सिलसिला 10वीं रमजान के सूरज डूबने से लेकर 20वीं रमजान के सूरज डूबने तक रहेगा। हर लम्हे में लाखों गुनाहगारों की मगफिरत होती है।

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दस दिनी तरावीह पूरी, मांगी दुआएं :

रमजान उल मुबारक के पहले दौर की तरावीह में कुरआन ए पाक मुकम्मल हो गया है। शहर की कई जगहों पर दस दिनी तरावीह के मुकम्मल होने पर मिठाईया बाटी गई। अंजुमन प्लाजा, थड़पखना आजाद गुल, मेन रोड तसलीम महल समेत अन्य जगहों पर हो रही तरावीह बुधवार की शाम मुकम्मल हो गई। यहा मुल्क में अमन और खुशहाली की दुआ की गई। नमाजियों में शीरणी बाटी गई। मौके पर तरावीह पढ़ाने वाले इमाम को इनामात से भी नवाजा गया। हर रोजेदार की होती है दुआ कबूल

अल्लाह हर मोमिन की दुआ कुबूल फरमाते हैं। बशर्ते कि किसी गुनाह की दुआ न करें यानी सवाल न करें कि गुनाह का फला काम करने में कामयाब हो जाऊंगा। दुआ कुबूल होने के लिए यह जरूरी नहीं है कि जो मागा वही मिल जाए, बल्कि कभी तो मुंह मागी मुराद पूरी हो जाती है और कभी यह होता है कि बंदे पर मुसीबत आने वाली थी, वह टल गयी। रमजान के महीने में रहमत के दरवाजे खुले हुए हैं। अल्लाह की तरफ से अवाज दी जा रही है कोई मुझ से मागने वाला है, जिसकी दुआएं कुबूल करूं। वह तो फरमा रहे हैं कि इफ्तार के वक्त माग लो हम कुबूल कर लेंगे। रात के आखिरी हिस्से में माग लो हम कबूल कर लेंगे। अल्लाह के रसूल हजरत सला. ने फरमाया है कि रमजान दुआ मागने का महीना है। वे खुद असर की नमाज के बाद से मगरिब तक मसजिद में ही बैठ जाते थे और वक्त तिलावत करते थे। इसलिए हर किसी को चाहिए कि वह रमजान के महीना तिलावत में गुजारे।

मौलाना ओबैदुल्लाह कासमी, खतीब एकरा मस्जिद।

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Posted By: Jagran