रांची : एकल अभियान के राष्ट्रीय पदाधिकारी ललन शर्मा समाज में जाना-पहचाना नाम है। झारखंड सहित पूरे देश में उनका प्रवास होता है। उनका ज्यादा समय ग्रामीण इलाकों में गुजरता है। गांवों में चल रहे एकल विद्यालय एवं ग्रामोत्थान योजना के तहत गो आधारित जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। आदिवासी बच्चों को कैसे ठीक से शिक्षा प्राप्त हो, इसकी चिंता हमेशा उन्हें रहती है। जब भी जरूरत पड़ती है दबे कुचलों की आवाज बनकर उनके बीच खड़े रहते हैं। विकास भारती के सचिव पद्मश्री अशोक भगत से प्रेरणा लेकर सामाजिक जीवन में काम करने वाले ललन शर्मा जब किसानों के बीच जाते हैं तो उनके समक्ष कई तरह की समस्याएं आती हैं। लोग अपनी समस्याओं को लेकर इनके बीच आते हैं। उन समस्याओं को संबंधित जगह पर प्रमुखता से उठाने का काम करते हैं। चाहे वह सरकारी योजना का विषय हो या कोई अन्य विषय। रांची में रहने पर आरोग्य भवन स्थित एकल के कार्यालय में लोगों से मिलते रहते हैं। इनकी बेबाकराय के कारण कई जगहों पर इन्हें परेशानी भी होती है। परंतु जो सही होता है उसे बोलने में हिचकते नहीं हैं। ललन शर्मा कहते हैं, लोगों की समस्याओं को संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाने में अच्छा लगता है। आप सुदूर जंगलों में स्थित गांवों में जाकर देखें वहां क्या स्थिति है। उनकी बात कोई सुनने वाला नहीं है। आप जब गांवों में जाएंगे तो लोग कैसे परेशान रहते हैं देखने को मिलेगा। स्वास्थ्य, बिजली एवं शिक्षा की समस्या को लेकर लोग परेशान रहते हैं। कौन-कौन सी सरकारी योजनाएं चल रही है, लोगों को पता नहीं है। कृषि क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं, परंतु जानकारी के अभाव में इसका लाभ किसानों को ठीक से नहीं मिल पाता है। वैसे लोगों की बात को संबंधित अधिकारी तक पहुंचाने का काम करता हूं। अच्छा लगता है। मैंने अशोक भगतजी को जब देखा तब लगा कि दबे कुचलों के लिए काम करने में बड़ा सुकून मिलता है। ये लोग जब आगे बढ़ेंगे तभी अपना देश विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा। वैसे लोगों की बातों को उठाने की जरूरत है।

By Jagran