रांची : कारा मुख्यालय में बुधवार को राज्य के 40 प्रोबेशन पदाधिकारियों की एक समीक्षा बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कारा महानिरीक्षक हर्ष मंगला ने उन्हें कैदियों के कल्याण की दिशा में तेजी लाने का आदेश दिया। कारा महानिरीक्षक ने प्रोबेशन पदाधिकारियों को बताया कि कैदियों के मामले में उनकी भूमिका अहम है। कैदियों के लिए किशोर न्याय बोर्ड, असमय कारा मुक्ति, पेरोल सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय भी प्रोबेशन पदाधिकारियों की रिपोर्ट पर होता है, इसलिए उन्हें पूरी संजीदगी से काम करने की जरूरत है। राज्य के सभी केंद्रीय काराओं में पीड़ित कल्याण कोष बने हुए हैं, जहां करोड़ों रुपये जमा हैं, लेकिन उसका वितरण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में पीड़ित को चिह्नित कर उन तक इस कोष का लाभ पहुंचाने की कोशिश करें। बैठक में सहायक कारा महानिरीक्षक, वरिष्ठ प्रोबेशन पदाधिकारी आदि मौजूद थे।

क्या करते हैं प्रोबेशन पदाधिकारी

-बंदी के समाजिक-आर्थिक स्थितियों का पता लगाते हैं। बंदी के गांव घर जाकर, उनके परिवार से पूछताछ, उनके घर के आसपास के लोगों से पूछताछ करते हैं।

-पीड़ित कल्याण कोष : इस कोष में कैदी की कमाई की एक तिहाई राशि जमा होती है। कैदी अगर किसी की हत्या करता है या किसी के साथ कोई अपराध करता है और सश्रम कारावास की सजा काटता है तो इस अवधि में जेल में उसे मेहनताना मिलता है। कैदी जिसके साथ अपराध करता है, उसके पीड़ित को उक्तराशि दी जाती है। पीड़ित परिवार के बारे में ब्योरा भी प्रोबेशन पदाधिकारी जिला पुलिस-प्रशासन के सहयोग से जुटाते हैं।

-किशोर न्याय बोर्ड के नियमों का अनुपालन करवाना।

-बंदी के पेरोल की अनुशंसा लिखना।

-बंदी के असमय कारामुक्ति के लिए प्रयास करना।

-बंदियों के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रयास करना।

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Posted By: Jagran