रांची, नीरज अंबष्ठ। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने निजी स्कूलों पर नकेल कसने वाले विधेयक 'झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन विधेयक' पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने उसकी अधिसूचना जारी करने व गजट में प्रकाशन के लिए विधि विभाग को भेज दिया है। गजट में प्रकाशित होते ही यह कानून लागू हो जाएगा।

विधानसभा के मानसून सत्र में यह विधेयक पास हुआ था। अब निजी स्कूलों के फीस तय करने के लिए स्कूल व जिलास्तर पर कमेटी गठित होगी। स्कूलस्तरीय कमेटी में अभिभावक भी होंगे। शुल्क के निर्धारण में स्कूल की स्थिति, उपलब्ध शैक्षणिक संरचना, शिक्षकों की संख्या तथा उन्हें दिए जानेवाले वेतन को ध्यान में रखा जाएगा। कमेटी प्रस्तावित शुल्क संरचना की मंजूरी एक माह के भीतर देगी। निर्धारित शुल्क दो वर्ष के लिए वैध होगा। इस तरह, स्कूल प्रत्येक वर्ष शुल्क में वृद्धि नहीं कर सकेंगे।

निजी स्कूल दस फीसद से अधिक शुल्क नहीं बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक शुल्क बढ़ाने के लिए उन्हें उपायुक्तों की अध्यक्षता वाली जिला कमेटी से अनुमोदन लेना होगा। यह जिला कमेटी उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित होगी। इसमें संबंधित क्षेत्र के सांसद और विधायक भी सदस्य होंगे। जिला कमेटी शुल्क बढ़ाने के विरोध को लेकर अभिभावकों के पक्ष की सुनवाई करेगी और 60 दिनों के भीतर अपना फैसला देगी। जिला कमेटी का आदेश दो साल के लिए मान्य होगा तथा इसके विरोध में मामला झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण को छोड़कर किसी अन्य सिविल न्यायालय में नहीं लाया जाएगा।

किताब-कॉपी खरीदने के लिए नहीं डाल सकेंगे दबाव : स्कूल परिसर में किताब, कॉपी, ड्रेस, जूता-मौजा आदि की बिक्री करने पर अभिभावकों और छात्र-छात्राओं को खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। वहीं, स्कूल परिसर का इस्तेमाल केवल शैक्षणिक कार्य के लिए किया जाएगा।

निजी स्कूलों की कमेटी में कौन-कौन : निजी स्कूलों की फीस कमेटी में स्कूल द्वारा मनोनीत प्रतिनिधि अध्यक्ष, प्राचार्य सचिव, तीन मनोनीत शिक्षक तथा अभिभावक संघ द्वारा नामित चार अभिभावक सदस्य होंगे।

अधिक फीस लेने पर रद होगी मान्यता : किसी स्कूल द्वारा इस अधिनियम का पहली बार उल्लंघन करने पर 50 हजार से ढाई लाख रुपये (या लिए गए अधिक शुल्क की दोगुनी राशि जो भी अधिक हो) तक जुर्माना देना होगा। दूसरी बार यह अपराध करने पर न्यूनतम राशि एक लाख रुपये हो जाएगी। राज्य सरकार उक्त स्कूल की मान्यता भी खत्म कर सकेगी।

यह भी प्रावधान: -झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण में मामला आने के बाद 30 दिनों के भीतर इसका निपटारा किया जाएगा। -न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध झारखंड उच्च न्यायालय में 90 दिनों के भीतर ही अपील की जा सकेगी। -स्कूलों को जिला कमेटी का निर्णय नोटिस बोर्ड तथा वेबसाइट में चिपकाना होगा। -जिला कमेटी बस शुल्क, वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क स्मार्ट क्लास शुल्क समेत सभी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष शुल्कों के निर्धारण में हस्तक्षेप करेगी।