रांची, राज्य ब्यूरो। रांची के डीएसपी सिटी प्राण रंजन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की आशंका प्रबल होती जा रही है। एक पुराने कांड में पुलिस मुख्यालय ने उनके विरुद्ध सरकार से अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इस मामले में गृह विभाग ने 19 जुलाई 2018 को डीएसपी प्राण रंजन से उनका पक्ष मांगा था और पत्र मिलने के 15 दिनों के भीतर जवाब देना था, लेकिन गृह विभाग को अब तक उनका पक्ष नहीं मिल पाया है। अब गृह विभाग उन्हें रिमाइंडर भेजने की तैयारी में है, ताकि विभागीय कार्रवाई के पूर्व उनका पक्ष जाना जा सके।

डीएसपी प्राण रंजन कुमार पर गोला (रामगढ़) थानेदार रहते हुए कोयला माफिया को सहयोग करने, अनुसंधान को दिग्भ्रमित करने, केस को कमजोर करने का आरोप है। हालांकि, डीएसपी प्राण रंजन कुमार ने पुलिस मुख्यालय को दिए अपने स्पष्टीकरण में खुद को निर्दोष बताया है।

वर्ष 2008 में रामगढ़ के गोला थाने में दर्ज हुआ था मामला : रामगढ़ के गोला थाने में 25 फरवरी 2008 को दारोगा मानसिद्ध तिर्की के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें 15 लोग आरोपित किए गए थे। उन पर बरलंगा स्टेशन से गुजरने वाली मालवाहक ट्रेनों से गरीब मजदूरों को प्रलोभन देकर कोयला उतरवा कर कोयले को ट्रैक्टर व साइकिल से ढुलवाकर गोला थाना क्षेत्र से सटे झालदा थाना क्षेत्र के डाकागढ़ा में जमा करने व तस्करी करने का आरोप था। उतरी छोटानागपुर क्षेत्र बोकारो के आइजी ने समीक्षा के दौरान पाया था कि कांड के अनुसंधानकर्ता गोला थाने के तत्कालीन थानेदार प्राण रंजन कुमार थे। उन्होंने प्राथमिकी अभियुक्त गोधू महतो, संजय अग्रवाल, अनिल गोयल, समीर उर्फ मुन्ना व नरेश गोसाई को असत्यापित दिखाते हुए तथा दस अन्य प्राथमिकी अभियुक्तों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर दी थी। आइजी ने पाया था कि जिन पांच अभियुक्तों को पुलिस ने असत्यापित दिखाया गया था, उनका अपराधिक इतिहास था। वे बड़े कोयला माफिया हैं, जिन पर रामगढ़ जिले के ही गोला थाने में कई कांड दर्ज थे। इसके अलावा धनबाद व बोकारो जिले में कोयला तस्करी के कई मामलों में वे चार्जशीटेड हैं। इसके बावजूद अनुसंधानकर्ता प्राण रंजन कुमार ने न तो इनका सत्यापन किया और न ही केस डायरी में अपराधिक इतिहास ही दर्ज किया। आइजी ने लिखा था कि प्राणरंजन ने लापरवाही बरती है, इसलिए उन पर विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया जाता है।

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