रांची, [मधुरेश नारायण]। झारखंड में कोल बेड मीथेन (सीबीएम) का एक बड़ा भंडार दामोदर घाटी में उपलब्ध है। केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर झारखंड के उद्योगों को ईंधन के मामले में आत्मनिर्भर करके उद्योग को नई ऊंचाई पर ले जाने की योजना बनाई है। कोल बेड से निकले वाले मीथेन को गेल के पाइपलाइन के माध्यम से लोगों के घरों में आपूर्ति करने की व्यवस्था भी की जा रही है।

इसके लिए राज्य के 503.11 वर्ग किमी क्षेत्र का चयन किया गया है। इसमें 250 से ज्यादा गैस के कुओं पर काम जारी है। सीबीएम के इस प्रोजेक्ट की प्लानिंग की जिम्मेदारी सीएमपीडीआइ के पास है। इस परियोजना से राज्य सरकार को 7 अरब 20 करोड़ का राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य है। साल 2022-23 तक सीबीएम के उत्पादन को 0.31 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूब मीटर का लक्ष्य रखा गया है।

सीबीएम का उत्पादन और इस्तेमाल पर्यावरण के लिए भी जरूरी

कोल बेड मीथेन (सीबीएम) का निर्माण भी कोयले के निर्माण के साथ ही हुआ था। सीबीएम का भंडार कोयले खदान में बीच-बीच में रहता है। कोयला खनन के वक्त इस गैस को निकाला जाता है। मगर मीथेन ग्र्रीन हाउस गैस का सबसे बड़ा घटक भी है इसलिए खुले में छोडऩे से पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। वहीं यदि इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाए तो उससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता है।

सीबीएम के उत्पादन से होगी खदान मजदूरों की सुरक्षा

मीथेन एक जहरीली और बेहद ज्वलनशील गैस है। खदान में इसके लेवल को एक मानक यूनिट पर 0.1 के स्तर पर रखा जाता है। इसकी निगरानी कई मशीनों से की जाती है। ये जैसे ही 3 मानक यूनिट के ऊपर जाता है खदान को खाली करा लिया जाता है। मगर कई बार फिर भी हादसे हो जाते हैं। गैस के अचानक रिसाव से मजदूरों की मौत हो जाती है। इससे निबटने के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि हम वहां से खनन के पहले ही मीथेन को निकाल लें। इससे जानमाल के बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

सीबीएम से दूर होगी बिजली की समस्या

सीबीएम के इस्तेमाल से राज्य को विद्युत ऊर्जा में सक्षम बनाया जा सकता है। ताप ऊर्जा में कोल के स्थान पर सीबीएम का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे ताप ऊर्जा केंद्रों में कोयले के जलने से होने वाले प्रदूषण को भी कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही खदानों से प्रतिदिन 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी संभव होगा।

सीएनजी की तरह किया जा सकता है इस्तेमाल

सीएनजी पहले से ही स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के रूप में जाना जाता है। मीथेन का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी किया सकता है। इसके लिए सीसीएल और सीएमपीडीआइ एक परियोजना पर कार्य कर रहे हैं।

झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगी मजबूती

सीबीएम से झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र में ईंधन के नये अध्याय की शुरुआत होगी। इसके सुपीरियर कम्ब्यूसन गुण के कारण धनबाद, बोकारो, पलामू क्षेत्रों के सीमेंट प्लांट, रिफैक्ट्रीज, रोलिंग मिल आदि जैसे उद्योगों के लिए ये इकोनॉमिकल फ्यूअल साबित हो सकेगी। इसके साथ ही स्टील प्लांट के फर्नेंस में थोड़ा बदलाव करके सीबीएम को ईंधन के रुप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

विभिन्न ईंधनों का ऊष्मीय मान

ईंधन       ऊष्मीय मान

कोयला      4500 कैलोरी /किलो

पेट्रोल       11110 कैलोरी /किलो

डीजल       11000 कैलोरी /किलो

सीएमबी      8500 कैलोरी /किलो

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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