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दवा दुकान पर गलत इंजेक्शन लगाने से 17 वर्षीय किशोर की मौत, गढ़वा में स्टोर से भारी मात्रा में मिलीं एक्सपायरी दवाएं

Published: Thu, 27 Aug 2026 04:00 PM (IST)

गढ़वा के बरडीहा में एक दवा दुकान में 17 वर्षीय किशोर की इलाज के दौरान मौत के बाद प्रशासन ने ...और पढ़ें

17 वर्षीय किशोर की मौत के बाद एक्सपायरी दवाएं और अवैध इलाज का खुलासा।

17 वर्षीय किशोर की मौत के बाद एक्सपायरी दवाएं और अवैध इलाज का खुलासा।

HighLights

  1. 17 वर्षीय किशोर की मौत के बाद प्रज्ञा ड्रग स्टोर सील।

  2. स्टोर से दर्जनों एक्सपायरी दवाएं और अवैध इलाज के उपकरण मिले।

  3. संचालक के पुत्र पर गलत इंजेक्शन से मौत का आरोप।

जागरण टीम, रांची/मझिआंव (गढ़वा)। बरडीहा थाना क्षेत्र के बरडीहा बाजार में एक झोलाछाप की लापरवाही ने एक हंसते-खेते परिवार की दुनिया उजाड़ दी। बिना लाइसेंस के अवैध रूप से चलाए जा रहे प्रज्ञा ड्रग स्टोर में गलत इलाज के कारण 17 वर्षीय किशोर की जान चली गई। पूरे मामले की रिपोर्ट रांची मुख्यालय को भी भेजी गई है।

इस सनसनीखेज मामले का संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की और दुकान को सील कर दिया है, जहां छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां और इलाज से जुड़े आपत्तिजनक सामान बरामद किए गए हैं।

ननिहाल आया था किशोर, सामान्य बुखार में चली गई जान

विशुनपुरा गांव के रहने वाले गणेश पाल का 17 वर्षीय पुत्र अनोज कुमार पाल पिछले सोमवार को अपनी मां के साथ जीका गांव स्थित अपने ननिहाल आया था। यहां अचानक तबीयत खराब होने और बुखार आने पर उसका मामा दिनेश पाल उसे इलाज के लिए बरडीहा बाजार स्थित प्रज्ञा ड्रग स्टोर ले गया।

परिजनों को क्या पता था कि जिस दुकान पर वे उम्मीद लेकर जा रहे हैं, वह किसी यमराज के अड्डे से कम नहीं है। दुकान पर संचालक नरेश प्रसाद के पुत्र शशि प्रसाद द्वारा किशोर का इलाज किया गया।

मना करने के बाद भी नस में लगाया खतरनाक इंजेक्शन

मृतक के मामा दिनेश पाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि वहां मौजूद शशि प्रसाद ने अनोज को सीधे नस में इंजेक्शन लगा दिया। परिजनों ने जब इसका विरोध किया और नस के बजाय कमर में इंजेक्शन लगाने की बात कही, तो तथाकथित डॉक्टर ने उनकी एक नहीं सुनी। इंजेक्शन लगते ही अनोज अचेत होकर बेहोश हो गया।

स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि सिफ्टरिया जोन ग्रुप के इस इंजेक्शन को बिना किसी चिकित्सीय जांच और एहतियात के लगाने के कारण ही मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।

छापेमारी में खुले काले कारनामे, अस्पताल जैसी चल रही थी अवैध दुकान

घटना की सूचना मिलते ही मझिआंव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉक्टर गोविंद प्रसाद सेठ और बरडीहा प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जब अधिकारियों ने दुकान की तलाशी ली, तो उनके होश उड़ गए।

दुकान के भीतर पेटी-दर-पेटी दर्जनों एक्सपायरी दवाइयां भरी पड़ी थीं। इसके अलावा, ड्रग स्टोर के अंदर मरीजों के लेटने के लिए बेड और ग्लूकोज (पानी) चढ़ाने का स्टैंड भी मिला।

इससे यह स्पष्ट हो गया कि यहां बिना किसी ड्रग लाइसेंस के अवैध रूप से बाकायदा मिनी अस्पताल चलाया जा रहा था, जहां लोगों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा था। प्रशासन ने फिलहाल स्टोर को पूरी तरह सील कर दिया है और इस गैरकानूनी धंधे में शामिल लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है।

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