रांची, जासं । कोरोना वायरल फ्लू के जैसा है। सर्दी-खांसी, बुखार या कोई अन्य सामान्य बीमारी होने पर भी एक सप्ताह से 10 दिन तक ठीक होने में लग ही जाता है। इसी तरह कोरोना भी है, ठीक होने में थोड़ा समय लगता है। इससे मृत्यु इसलिए होती है, यदि सही समय पर इलाज शुरू नहीं हो पाता है। लक्षण दिखते ही डाक्टर से संपर्क कर दवाई लेना शुरू कर दें तो कोई समस्या ही नहीं होनी है। मैंने ऐसा ही अनुभव किया। यह कहना है सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव का। उन्होंने कहा कि मेरी तीन बार पॉजिटिव रिपोर्ट आई।

लेकिन मुझे मालूम था कि मैं ठीक हूं और कुछ नहीं होने वाला है। एक बार सिर्फ आक्सीजन लेवल 86 पर चला गया तो हरमू अस्पताल से संपर्क किया। वहां पता कर लिया कि आक्सीजन की जरूरत पड़ने पर मिल सकता है या नहीं। वहां बताया गया कि आक्सीजन की व्यवस्था है। इसके बाद मैंने डाक्टर से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि आप तकिया लगाकर पेट के बल लेटें। मैंने ऐसा ही किया तो आक्सीजन लेवल 94 आ गया। इसके बाद मैं उसी तरह सोने लगा। फिर आक्सीजन लेवल बढ़ा ही घटा नहीं।

सभी फ्रेंड पॉजिटिव हो गए थे, लेकिन बातें निगेटिव नहीं होती

प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि उन्हें 31 मार्च को बुखार आना शुरू हुआ तो तत्काल होम आइसोलेशन में चला गया और डाक्टर से संपर्क कर दवाई लेना शुरू कर दिया। सात अप्रैल को रिपोर्ट पाजिटिव आया। इसके कुछ दिनों बाद दो बार टेस्ट कराया तो पाजिटिव ही आता रहा। 14 अप्रैल से मैं ठीक महसूस करने लगा। किसी प्रकार का कोरोना का लक्षण भी नहीं रहा। अंतत: एक मई को रिपोर्ट निगेटिव आया। अब कोई समस्या नहीं है। प्रदीप कहते हैं कि कोरोना से डरकर भी आप कुछ नहीं कर सकते हैं। यदि ठीक हाेना है तो मनोबल बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि मेरे कई दोस्त भी पाजिटिव हो गए थे। सभी एक दूसरे का हालचाल पूछते रहते थे। सभी दोस्त पॉजिटिव थे और बातें भी पाजिटिव होती थी। इस कारण जल्द निगेटिव हो गया।

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