प्रदीप शुक्ला, स्थानीय संपादक, झारखंड। वैसे झारखंड विधानसभा का कार्यकाल दिसंबर में पूरा हो रहा है और इस लिहाज से अभी नई सरकार के गठन में करीब साढ़े तीन महीने का समय बाकी है, लेकिन राजनीतिक गलियारे में जो हवा बह रही है उसके मुताबिक, इस बार झारखंड में तय समय से पहले चुनाव की घोषणा हो सकती है। इसके पर्याप्त कारण हैं।

इसे भांप कर ही राजनीतिक दल खासकर सत्तारूढ़ दल भाजपा पूरे दमखम से चुनाव मैदान में उतर ही चुकी है। संगठन के कील-कांटे दुरुस्त करने के बाद अगले चरण के कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं। विपक्ष भी इस कसरत में जुटा हुआ है, लेकिन लोकसभा चुनाव की ही तरह वहां अभी असमंजस बरकरार है। अगर, झामुमो को छोड़ दें तो अन्य विपक्षी दल अपनी बची-खुची ताकत को बचाने में ही जूझ रहे हैं।

  1. झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां शुरू
  2. हरियाणा-महाराष्ट्र के साथ हो सकता है सितंबर के आखिर तक ऐलान
  3. लोकसभा चुनाव की भांति दैनिक जागरण अपने पाठकों को रखेगा आगे
  4. योजनाओं की जमीनी पड़ताल से कर रहे विधानसभा चुनाव का आगाज

सत्तापक्ष से लेकर विपक्ष तक सभी अपने कुनबे को मजबूत करने में लगे हैं। चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद इस प्रक्रिया में और तेजी आएगी। चुनाव में स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय समस्याओं के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर चल रही हलचल का लाभ-नुकसान राजनीतिक दलों को मिलना तय है। भाजपा इसे बखूबी समझ रही है। झारखंड गठन के बाद रघुवर दास पहले मुख्यमंत्री होंगे, जो अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर जनता से वोट मांगने जाएंगे।

केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की रघुवर सरकार की कैमेस्ट्री काफी अच्छी रही है और इसका सीधा फायदा राज्य के लोगों तक पहुंचा है। बेशक, तमाम सेक्टरों में झारखंड ने देश के अन्य राज्यों के मुकाबले काफी अच्छा काम किया है, फिर भी अभी बहुत कुछ होना बाकी भी है। जो होना बाकी है वही मुद्दे होंगे, जो विपक्ष को ताकत देंगे, बशर्ते वह एकजुट होकर चुनाव लड़ सकें।

डबल इंजन सरकार के नारे पर भाजपा लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित सफलता हासिल करने में कामयाब रही थी। चौदह में बारह सीटें बरकरार रखते हुए उसने विपक्ष के सारे सत्ताविरोधी अभियानों की हवा निकाल दी थी। उससे भाजपा संगठन काफी उत्साहित है। ऊपर से केंद्र की मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल में जिस तरह शुरुआत की है वह भी स्थानीय संगठन को बल दे रहा है।

जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद-370 के खात्मे के बाद पूरे राज्य में राष्ट्रवाद परवान पर है। सत्ताधारी भाजपा ने राज्य में विधानसभा चुनाव के निमित्त प्रभारियों की घोषणा भी कर दी है। दलों में टिकट की होड़ मच चुकी है। रोजाना राजनीतिक मिलन समारोह इसकी बानगी है। वैसे विपक्ष बिखरा पड़ा है। झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन महागठबंधन की कोशिशों में जुटे हुए हैं, बेशक उनके कार्यकर्ता मन से इसके लिए तैयार नहीं हैं।

लोकसभा चुनाव के बाद समीक्षा बैठकों में कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध भी जताया था। कार्यकर्ताओं को कहना था कि गठबंधन का फायदा कांग्रेस को तो मिला, झामुमो को नहीं। झामुमो यह समझ भी रहा है, लेकिन अकेले चुनाव में जाने की हिम्मत इस समय विपक्ष में नहीं है और शायद यही बड़ा कारण महागठबंधन की नींव खड़ा करने में कारगर बने। फिलहाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. अजय कुमार इस्तीफा दे चुके हैं। राजद में तेजस्वी यादव लोकसभा चुनाव के बाद ही लगभग गायब हैं। लालू जरूर सक्रिय हैं, लेकिन अब हालात उनके अनुकूल नहीं रहे। संगठन स्तर पर झाविमो और माकपा का हाल-बेहाल ही है।

विधानसभा चुनाव में लोगों की पसंद-नापसंद का एक बड़ा आधार राज्य सरकार का कामकाज होता है। 2014 के विधानसभा चुनाव के पूर्व राज्य में अस्थिर सरकारों का शासन रहा, जिससे विकास की गति बुरी तरह प्रभावित हुई। संयोग से 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में पहली बार बहुमत की सरकार का शासन है। इस दौरान स्थानीयता नीति सरीखे सर्वाधिक जटिल मसले पर सरकार ने जहां अपनी नीति स्पष्ट करने में कामयाबी पाई वहीं विकास की रैंकिंग में भी झारखंड की स्थिति बेहतर रही।

राज्य कई मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जहां काम करना बाकी है अथवा तेजी से काम अपेक्षित है। लोकसभा चुनाव के दौरान विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत हमने परखी थी। ठीक उसी प्रकार हम आसन्न विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य में अलग-अलग क्षेत्र में हुए कामकाज की जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे। हमारी टीम उन योजनाओं की गहराई से पड़ताल करेगी, जिन पर रघुवर दास सरकार को नाज है। रिपोर्ट के माध्यम से हम सरकार के काम को तो परखेंगे ही, विपक्ष से भी पूछेंगे, जो कुछ नहीं हुआ उसके लिए उन्होंने अपनी भूमिका से क्या न्याय किया?

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप

आज़ादी की 72वीं वर्षगाँठ पर भेजें देश भक्ति से जुड़ी कविता, शायरी, कहानी और जीतें फोन, डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Alok Shahi