रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने सभी एसएसपी-एसपी को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। लिखा है कि जिलों से कनीय पदाधिकारी एवं पुलिसकर्मी जो अत्यंत वीरतापूर्ण कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भी हम वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक/वीरता पुलिस पदक से सम्मानित नहीं करा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि जिलों से त्रुटिरहित प्रस्ताव ससमय नहीं भेजा जा रहा है। पुलिस बल के नेतृत्वकर्ता होने के नाते यह नैतिक दायित्व भी है कि समय निकालकर सभी योग्य मामलों में ससमय अच्छा व त्रुटिरहित प्रस्ताव भेजें।

कुछ बिंदु, जिसमें गिनाई कमियां, दिया सुझाव

  • राष्ट्रपति पुलिस पदक/वीरता पुलिस पदक के लिए प्रस्ताव भारत सरकार के निर्धारित विहित प्रपत्र में नहीं रहता है।
  • प्रस्ताव का विहित प्रपत्र में रहने पर भी उसके सभी कॉलम सही-सही नहीं भरे जाते हैं।
  • प्रस्ताव भेजने में विलंब होने पर भी उसमें विलंब का कारण सही-सही नहीं भरा जाता है। जबकि, फॉर्म में यह स्पष्ट उल्लेख है कि घटना के एक वर्ष बीतने के बाद प्रस्ताव भेजने पर उसमें विलंब का कारण अंकित किया जाना है।
  • घटना का सही विवरण नहीं रहना। जैसे प्रथम सूचना, थाना दैनिकी के रूप में हो सकता है। अन्य कहीं दूरभाष, वायरलेस पर दर्ज कराई गई सूचना या एसपी को भेजा गया प्रतिवेदन हो सकता है।
  • प्रस्ताव के साथ प्राथमिकी, पर्यवेक्षण रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, न्यायिक अनुसंधान रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज, इंज्यूरी रिपोर्ट, जब्ती सूची, हथियारों के बारे में जानकारी।
  • प्रस्ताव ससमय पुलिस मुख्यालय को उपलब्ध नहीं कराया जाता है।
  • प्रस्ताव पर पुलिस मुख्यालय से कुछ पूछा जाता है तो उसका जवाब देने में महीनों लग जाता है। रिमाइंडर के बावजूद नहीं मिलता है।
  • किसी घटना में जिसमें जिला पुलिस व सीआरपीएफ एक साथ अभियान में शामिल होते हैं, इसमें केंद्रीय पुलिस बल के संबंध में मंतव्य ससमय मिल जाता है, लेकिन जिला पुलिस का प्रस्ताव विलंब से मिलता है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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