रांची, जासं। रांची पुलिस के हत्थे चढ़ा पीएलएफआइ कमांडर अखिलेश गोप को पुलिस ने छह दिनों की रिमांड पर लेकर पूछताछ की। इसके बाद गुरुवार को वापस जेल भेज दिया है। इससे पहले पुलिस की पूछताछ में उसने बताया है कि पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप का जगन्नाथपुर इलाके के हेसाग में चार फ्लैट और नगड़ी के पिस्का रेलवे क्रॉसिंग के पास एक होटल है। हेसाग वाले चार फ्लैट को हेसाग मुस्लिम मोहल्ला निवासी मुबारक खान पिता इब्राहिम खान ने सीधे तौर पर दिनेश गोप से जुड़कर संगठन का पैसा इंवेस्टमेंट करवाकर बनवाया है। वह अपने भाई के माध्यम से सुप्रीमो से जुड़ा है। उसकी ससुराल खूंटी के कर्रा में है। वह आ‌र्म्स एक्ट के केस में जेल भी जा चुका है। जबकि नगड़ी वाले होटल के लिए बालकरण महतो ने दिनेश गोप से इंवेस्ट करवा बनवाया है। इसके अलावा संगठन के पास करीब 50 से 55 एके 47 रायफल हैं। इन हथियारों को दिनेश गोप के नेतृत्व में रखा जाता है। उसके इस्तेमाल की जिम्मेदारी भी दिनेश गोप के पास ही है। बड़े रकम की लेवी खुद वसूलता है सुप्रीमो : अखिलेश की स्वीकारोक्ति बयान के अनुसार बड़े रकम की लेवी दिनेश गोप खुद वसूलता है। छोटे रकम की लेवी वसूली अखिलेश खुद करता है। दिनेश गोप के इशारे पर खूंटी के पुराना पानी स्थित जहाना ईट भट्ठा से हर माह दस हजार रुपये, लतरातू और कजरिया मुखिया से हर माह पांच हजार रुपये वसूलता है। नगड़ी का सीमेंट व्यवसायी बजरंग महतो पीएलएफआइ का शुभचिंतक है। वह कभी-कभी लेवी की रकम देता है। कर्रा के सागोर निवासी सड़क निर्माण का ठेकेदार पवन सोनी से पांच फीसद कमीशन लेता है। अबतक 40 हजार रुपये ले चुका है। जबकि सिरका क्रशर से 20 हजार वार्षिक लेवी वसूलता है। दो लाख से ऊपर की लेवी वसूली की जिम्मेदारी सबजोनल कमांडर राजेश गोप उर्फ तिलकेश्वर या खुद दिनेश गोप के जिम्मे होती है। दोनों क्षेत्र में भ्रमणशील रहकर लेवी की रकम उठाते हैं। अखिलेश द्वारा उठाए गए लेवी की रकम में से 70 फीसद दिनेश गोप ले लेता है। 30 फीसद से ही संगठन का विस्तार करना और अन्य खर्च चलाना पड़ता है। ये हैं मददगार : मंगरा उरांव, संग्राम तिर्की, धरम महतो, बिरसा तिर्की, शंकर महतो, पवन महतो, संदीप धान, उत्तम महतो, राजकुमार महतो, जठलू महतो, अवधेश यादव और दुर्गा सिंह। इनमें दुर्गा और अवधेश संगठन से जुड़े हैं। अबतक 13 की कर चुका है हत्या : अखिलेश ने पहली बार वर्ष 2016 में हत्या की घटना को अंजाम दिया था। अबतक के खुलासे में 13 लोगों की हत्या में संलिप्तता मिली है। कर्रा में दशरथ साहू व निशा कुमार, अनिल पारदिया व नंदकिशोर महतो की हत्या, तुपुदाना के हुड़िंगदाग में जाकिर अंसारी सहित छह की हत्या, नगड़ी में लेवी के लिए बाबू खान की हत्या, चेटे गांव में कंस्ट्रक्शन साइट पर लगे इंजीनियर और सुपरवाइजर की हत्या की थी। हाल में बीते 3 नवंबर की रात बंडा गांव में पांच लाख लेवी के लिए ट्रैक्टर में आगजनी और मजदूर पर गोलीबारी की थी। अखिलेश के खिलाफ रांची के तुपुदाना, इटकी, नगड़ी, खूंटी के जरियागढ़, खूंटी, लापुंग और कर्रा थाने में मामले दर्ज हैं। 2014 में पीएलएफआइ से जुड़ा था अखिलेश : अखिलेश ने बताया है कि वह बिरसा कॉलेज खूंटी में 11वीं में दाखिला के बाद ही उग्रवादी बन गया था। वह खूटी के बमरजा में दिनेश साव के संपर्क में आया था। इसके बाद वर्ष 2014 में पीएलएफआइ संगठन से जुड़ गया था। बीते 13 नवंबर को रांची और खूंटी पुलिस ने अखिलेश गोप, हार्डकोर विनोद सांगा उर्फ झुबलू सहित 13 उग्रवादियों को जेल भेजा था। अखिलेश नगड़ी से अपने आठ साथियों संग पकड़ा गया था। जबकि विनोद सांगा तीन साथियों के साथ कर्रा से पकड़ा गया था। 16 नवंबर को पुलिस रिमांड पर लिया गया था।

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