चतरा, जागरण संवाददाता। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, इटखोरी में दोपहर तीन बजे के बाद अगर कोई बीमार या घायल व्यक्ति पहुंचता है, तो उसे तत्काल चिकित्सीय सुविधा मिलना संभव नहीं है। रोगी या घायल को तब तक इंतजार करना पड़ता है, जब तक प्राइवेट क्लीनिक से चिकित्सक अस्पताल नहीं आ जाते हैं। गुरुवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देखने को मिला। दोपहर करीब साढे तीन बजे पितीज के समीप मोटरसाइकिल दुर्घटना में घायल हुए चौपारण के ग्राम इंगुनिया निवासी रमेश कुमार को एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया।

इलाज के अभाव में मौत

खून से लथपथ युवक को एंबुलेंस से उतारकर तत्काल आपरेशन थिएटर में ले जाया गया। लेकिन उस वक्त अस्पताल में ड्यूटी पर कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं थे। अस्पताल के कुछ स्वास्थ्य कर्मी खून से लथपथ युवक के चेहरे पर फैले खून को पोछने में लग गए। एक स्वास्थ्य कर्मी ने मोबाइल से डा. अजीत कुमार को सूचना दी। करीब 20 मिनट के बाद चिकित्सक अस्पताल पहुंचे। जांच के पश्चात उन्होंने खून से लथपथ युवक को मृत घोषित कर दिया। हैरत की बात देखने को यह भी मिली कि युवक को मृत घोषित करने के पश्चात डा. अजीत पुन: अपने प्राइवेट क्लीनिक की ओर रवाना हो गए।

आनंदी को भी नसीब नहीं हुआ इलाज

सड़क दुर्घटना में घायल रमेश को मृत घोषित करने के पश्चात जब डा. अजीत कुमार अस्पताल से बाहर निकल रहे थे, तो उसी वक्त ग्राम नगवा के गोविंदा दांगी अपनी पुत्री आनंदी का इलाज कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आए हुए थे। उन्होंने चिकित्सक से आग्रह किया कि उनकी पुत्री के पैर में पेंसिल की नोक चूभ गई है। उसे इलाज की दरकार है। लेकिन इसके बाद भी डा. अजीत अस्पताल में नहीं रुके। अपनी कार में सवार होकर प्राइवेट क्लीनिक की ओर रवाना हो गए।

ड्यूटी के बाद भी चिकित्सक को स्वास्थ्य केंद्र में ही मौजूद रहना है। डा. अजीत स्वास्थ्य केंद्र में क्यों नहीं थे, इसकी जांच की जाएगी।

डा. एसएन सिंह सिविल सर्जन, चतरा

Edited By: Madhukar Kumar