झारखंड में पशु सखियों ने संभाला 2 करोड़ पशुओं के टीकाकरण का जिम्मा, समस्याओं के बाद भी पूरा किया टारगेट
पशुपालन विभाग ने झारखंड में पशु सखियों के सहयोग से 2.08 करोड़ पशुओं का टीकाकरण अभियान पूरा किया है, जिसमें पहली बार गाय-भैंसों का भी टीकाकरण शामिल है।

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
पशु सखियों ने झारखंड में 2.08 करोड़ पशुओं का टीकाकरण किया।
पहली बार गाय-भैंसों के टीकाकरण में पशु सखियों को लगाया गया।
टीकाकरण अभियान में मोबाइल नेटवर्क और ओटीपी की समस्या आई।
मनोज सिंह, रांची। पशुपालन विभाग की ओर से इस बार पशु सखी के सहयोग से पूरे राज्य में पशुओं का टीकाकरण किया गया है। विभाग की ओर से प्रशिक्षित 1500 पशु सखियों को इस कार्य में लगाया गया था।
राज्य में करीब साढ़े सात हजार टीकाकरण करने वालों की जरूरत है। वर्तमान में करीब तीन हजार पशु मित्र विभाग के साथ जुड़े हैं। लेकिन विभाग की ओर से पहली बार जेएसएसपीएस (झारखंड राज्य आजीविका मिशन) से जुड़ी पशु सखियों को गाय-भैंस के टीकाकरण कार्य में लगाया गया है।
राज्य में करीब 2.08 करोड़ पशु हैं। जिनमें गाय और भैंस 1.17 और बकरी और भेड़ की संख्या 91 हजार है। पशुपालन विभाग की ओर से फिर से 1500 अन्य पशु सखियों को प्रशिक्षण देकर अपने साथ जोड़ने की योजना है। जिसके लिए विभाग की ओर से कार्रवाई भी की जा रही है।
एफएमडी और पीपीआर का टीकाकरण पूरा
विभाग ने दावा किया है कि पूरे राज्य के पशुओं का टीकाकरण कर दिया गया है। इसमें खुरपका-मुंहपका (एफएमडी), और बकरी, भेड़ में होने वाले ब्रूसेलोसिस और अन्य संक्रामक रोगों के बचाव के लिए टीकाकरण शामिल है।
इसके लिए करीब दस करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है। टीकाकरण करने वाले पशु मित्र और पशु सखियों को पांच रुपये प्रति पशु टीकाकरण करने की राशि दी गई है।
उक्त राशि तभी उनको मिलेगी जब टीकाकरण से संबंधित डाटा भारत पशुधन एप पर अपलोड किया जाएगा। पशु सखियों के जरिए बकरी और भेड़ के टीकाकरण कराया जाता था लेकिन इस बार प्रशिक्षण देकर उन्हें गाय-भैंस का भी टीकाकरण करने के लिए तैयार किया गया था।
टीकाकरण में आईं कई समस्याएं
इस अभियान के तहत पशु मित्र या पशु सखी सुबह सात बजे से 11 बजे टीकाकरण किया जा रहा था। पशु मालिक के मोबाइल पर ओटीपी आने का बाद ही टीकाकरण की कार्यवाही की जानी थी। कई बार पशुपालक ओटीपी देने से मना भी कर देते हैं।
उसी स्थान से भारत पशुधन एप पर पशु पालक का विवरण अपलोड करना है। झारखंड की भोगौलिक स्थिति को देखते हुए हर गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या का सामना करना पड़ता है।
एप में ऐसा प्रविधान किया गया है। गांव से बाहर निकल कर उक्त डाटा को अपलोड नहीं किया जा सकता है। इसकी एक दूरी निश्चित की गई है।
पहली बार गाय और भैंस के टीकाकरण के लिए पशु सखियों को लगाया गया है। इसके लिए उन्हें विभाग की ओर से प्रशिक्षण भी दिलाया गया था। -रोबिन टोप्पो, निदेशक, पशुपालन विभाग
