रांची, जेएनएन। हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र के सलगा पंचायत में घर व समाज से बगावत कर शादी रचाने वाले एक प्रेमी जोड़े को परिवार और समाज ने नकार दिया है। इस मुद्दे पर हुई पंचायत में नव दंपती को गांव छोडऩे का फरमान जारी किया गया है। दोनों ने एक सप्ताह पूर्व भागकर रांची के एक मंदिर में शादी रचा ली थी। गुरुवार की शाम वापस घर लौटने पर प्रेमी जोड़े को विरोध का सामना करना पड़ा।

बताया जाता है कि इस मुद्दे पर शुक्रवार को गांव में एक पंचायत हुई। शादी करने वाले प्रेमी जोड़े का नाम संगीता व आशीष कुमार है। दोनों एक साथ एकलव्य कॉलेज में पढ़ते थे। दोनों ने तीन जनवरी को घर-समाज की मर्जी के खिलाफ रांची के एक मंदिर में जाकर शादी कर ली। एक सप्ताह बाद दोनों घर लौटे तो गुरुवार को इस मुद्दे पर गांव में पंचायत हुई, जिसमें पंचायत ने दोनों को गांव छोडऩे का फरमान सुना दिया।

सौतेली बेटी होने के कारण बेच दिया था पिता ने

गढ़वा के बाना मसुरिया गांव निवासी अनिल राम द्वारा एक वर्षीया सौतेली बेटी को बेचे जाने का मामले में खुलासा हुआ है कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के विपरीत गोदनामा तैयार कराकर अनिल राम ने बच्ची को 50 हजार रुपये में कंगालू राम व उसकी पत्नी गंगोत्री देवी को बेचा था। उसने बच्ची को सौतेली बेटी होने के कारण बेचा था। वहीं, बेटी को पाने के लिए सीडब्ल्यूसी गढ़वा को आवेदन  देकर गुहार लगाने वाली ललिता देवी ने भी कई तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया था।

बताते चलें कि सदर थाना क्षेत्र के बाना मसुरिया गांव के अनिल राम के विरुद्ध  सीडब्ल्यूसी (बाल कल्याण समिति) गढ़वा में उसकी पत्नी ललिता देवी ने आरोप लगाया था कि छह वर्ष पूर्व उसकी एक वर्षीया बेटी को अनिल ने पलामू जिले के सतबरवा थाना के रेवा धावाडीह निवासी कंगालू राम व गंगोत्री देवी को 50 हजार रुपये लेकर उनको बेच दिया था। इस मामले के सीडब्ल्यूसी के संज्ञान में आते ही छह वर्ष बाद उस बच्ची का रेस्क्यू किया गया। फिलवक्त बच्ची को पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के दिव्यांग आवासीय विद्यालय में रखा गया है।

Posted By: Alok Shahi

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