राज्य ब्यूरो, रांची : केंद्र सरकार ने पिछले साल कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ जाने पर सितंबर माह में देशभर के 162 अस्पतालों में प्रेशर स्विग ऐड्सॉर्प्शन (पीएसए) आक्सीजन प्लांट लगाने की मंजूरी दी थी। इनमें चार प्लांट झारखंड में लगने थे। देश के अन्य राज्यों के 33 अस्पतालों में ये ऑक्सीजन प्लांट तो लग चुके, लेकिन झारखंड के एक भी अस्पताल में यह अभी तक नहीं लग पाया है।
अब कोरोना की दूसरी लहर में राज्य में आक्सीजन की किल्लत होने पर केंद्र से संपर्क कर मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में यह प्लांट लगाने की कवायद शुरू हुई है। यदि इसपर तेजी से भी काम होता है, तो इसमें कम से कम एक माह लग जाएंगे। यदि ये प्लांट अबतक लग जाते, तो राज्य के इन मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में कम से कम आक्सीजन की कमी की समस्या नहीं होती।
केंद्र सरकार ने पिछले साल पीएम केयर फंड से देशभर के 162 अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट लगाने की मंजूरी दी थी, जिनमें झारखंड के तीन मेडिकल कॉलेजों एवं एक सदर अस्पताल में आक्सीजन प्लांट लगाए जाने थे। इनमें रिम्स, रांची, पीएमसीएच, धनबाद, एमजीएम जमशेदपुर तथा रांची सदर अस्पताल शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार को आधारभूत संरचनाएं उपलब्ध करानी थी, जबकि केंद्र सरकार प्लांट लगाने में सहयोग करती। विभाग के अलावा संबंधित मेडिकल कॉलेजों द्वारा तत्परता नहीं दिखाने तथा केंद्र से समन्वय के अभाव के कारण इसमें देर हुई। नतीजा अभी तक इसपर काम शुरू ही नहीं हुआ। बताया जाता है कि अब इसे लेकर पहल हुई है। इसपर केंद्र के पदाधिकारियों से बात कर शीघ्र प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया है। इसे लेकर संबंधित मेडिकल कॉलेजों को आधारभूत संरचनाएं उपलब्ध कराने को भी कहा गया है। जो भी हो, इसपर युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है।
इधर, औषधि प्रशासन ने भी पिछले साल कोरोना संक्रमण की पहली लहर में ही आक्सीजन की कमी सामने आने पर राज्य के मेडिकल कॉलेजों के अलावा उन सभी सदर अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट लगाने की अनुशंसा की थी, जो 500 बेड के हो चुके हैं या जिनमें इतने बेड उत्क्रमित होने वाले हैं।
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इन राज्यों में लगे प्लांट :
मध्य प्रदेश में पांच, हिमाचल प्रदेश में चार, चंडीगढ़, गुजरात एवं उत्तराखंड में तीन-तीन, बिहार, कर्नाटक और तेलंगाना में दो-दो तथा आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी, पंजाब और उत्तर प्रदेश में एक-एक अस्पताल में प्लांट लग चुके हैं।
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क्या है पीएसए ऑक्सीजन प्लांट :
जानकारों के अनुसार, आक्सीजन पीएसए प्लांट ऑक्सीजन को वायुमंडलीय हवा से दबाव स्विग के माध्यम से सोखना तकनीक से अलग करता है। कंप्रेस्ड हवा, जिसमें लगभग 21 फीसद ऑक्सीजन तथा 78 फीसद नाइट्रोजन होते हैं, को जिओलाइट आणविक छलनी से होकर गुजारा जाता है, जिससे ऑक्सीजन अलग हो जाता है। वर्तमान में राज्य के किसी अस्पताल में यह व्यवस्था नहीं है।
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