संजय कुमार, रांची

रांची के समाजसेवी एवं व्यवसायी पवन मंत्री से चुनाव के मुद्दे पर चर्चा करने का मौका मिला। वे चुनावी चर्चा के दौरान इतिहास में खो गए। कहा, अभी तो लगता ही नहीं कि चुनाव भी हो रहा है। 70 से 90 के दशक तक रात भर भोपू की आवाज शहर से लेकर गांवों तक सुनाई पड़ती थी। लोग परेशान हो जाते थे। एक जीप गई नहीं की दूसरी जीप पीछे से आ जाती थी। उस समय प्रचार वाहन के रूप में जीप ही विकल्प था, अब तो जीप कहीं नहीं दिखता है। आवाज इतनी होती थी कि बच्चों की पढ़ाई बाधित होती थी। परंतु 1993 में जब टीएन शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त बने तब सरकार एवं लोगों को चुनाव आयोग के अधिकार क्या होते हैं, याद दिलाया। उसके बाद तो चुनाव के प्रचार में बहुत परिवर्तन आ गया। दिन-रात प्रचार पर रोक लगी। 10 बजे रात्रि के बाद गांवों में भी भोपू की आवाज सुनाई नहीं पड़ती है। आवाज भी इतनी कि एक किमी दूर आवाज सुनाई नहीं पड़े। चुनाव में कितनी राशि खर्च होगी, इस पर नियंत्रण किया गया। प्रत्याशियों को पूरा हिसाब देना पड़ता है।

पवन मंत्री ने कहा कि पहले चुनाव प्रचार के लिए दीवारों पर लेखन का काम होता था। अधिकतर दीवारों को लोग गंदा कर देते थे। परंतु अब इस पर रोक लग गई है। यह बहुत ही अच्छा काम हुआ है। अब तो शहर में निकलने पर लगता ही नहीं है कि चुनाव प्रचार का काम भी चल रहा है। अखबारों एवं टीवी के माध्यम से ही पता चलता है कि कहां-कहां कौन प्रत्याशी प्रचार किए। प्रचार वाहन जो घूम रहे हैं उस पर भी धीमे आवाज में गाना बजता रहता है। पहले देर रात तक नेताओं की सभा होती थी। लोग घंटों इंतजार करते रहते थे। एक बार रांची में जिला स्कूल में लालकृष्ण आडवाणी की सभा थी। मैं भी सुनने गया था। तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा था। अब 10 बजे के बाद सभा भी नहीं होती। आवागमन के साधन बढ़ जाने से नेता अब समय से चुनाव प्रचार कर पा रहे हैं। हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज से ही नेता लोग आ जा रहे हैं।

Posted By: Jagran

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