रांची {शक्ति सिंह}।अब रिम्स आने वाले मरीजों के दिल का बेहतर तरीके से ख्याल रखा जाएगा। दिल की धड़कनें भी ठीक ढंग से धड़केंगी। देर ही सही पर लंबे इंतजार के बाद रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग को नए कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। वह भी एक नहीं बल्कि दो -दो कैथ लैब की। फिलहाल रिम्स में एक कैथ लैब मशीन उपलब्ध करा दी गई है जिसे दो महीने के अंदर इंस्टॉल कर दिया जाएगा। जबकि दूसरी कैथ लैब मशीन बंदरगाह पर पहुंच गई है।

मरीजों को इलाज के लिए नहीं करना पड़ेगा इंतजार :

इन दोनों मशीनों की सुविधा मरीजों के मिलने से अब उन्हें कैथ लैब में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी के लिए ज्यादा इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि अस्पताल में आने वाले मरीजों का समय पर उपचार हो सकेगा। रिम्स में पुराना कैथ लैब अक्सर खराब रहता है। यही वजह है कि रिम्स आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मरीज की संख्या अधिक होने और मशीन काफी पुरानी होने के कारण कैथ लैब की सेवा मरीजों को ठीक ढंग से नहीं मिल पाती है। कई बार तो लंबे दिनों तक मरीज को जिस से वंचित रहना पड़ता है। इस मशीन के खराब होने पर कोई भी विकल्प नहीं बच पाता है और ऐसे हालात में मरीजों को रिम्स से वापस लौटना मजबूरी हो जाती है

रिम्स में होता है रोजाना 50 इको

रिम्स में रोजाना 50 मरीजों का इको और 15 मरीजों को कैथ लैब की सेवा दी जाती है। लेकिन आए दिन मशीन के खराब रहने के कारण यह संख्या दिनों दिन बढ़ती चली जाती है। रिम्स में दो नए इको मशीन मरीजों की सुविधा को लेकर उपलब्ध कराई गई है। नई मशीन की खरीदारी होने से अब मरीजों को पहले से बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पुरानी इको मशीन के खराब रहने के कारण अक्सर मरीजों को अस्पताल से वापस लौटना पड़ता था या फिर निजी संस्थान में इको की जांच करानी पड़ती थी। लेकिन अब स्थिति पहले से बेहतर हुई है। उल्लेखनीय है कि नई मशीन के आने के पहले पिछले एक वर्ष से इको मशीन काम नहीं कर रही थी। इस कारण मरीजों का इको नहीं हो पा रहा था। ऐसे में इलाज करने में चिकित्सकों को भी परेशानी हो रही थी।

क्या है इको जांच और कैथ लैब :

इको मशीन के माध्यम से चिकित्सक मरीज के हार्ट के पंप को देखते हैं। वही एंजियोग्राफी, एनजीओ प्लास्टी और पेसमेकर के लिए कैथ लैब की सेवा लेनी पड़ती है।

Edited By: Kanchan Singh