रांची, राज्य ब्यूरो। Nitish Kumar and Tejashwi Yadav Alliance बिहार में राजनीतिक बदलाव का असर झारखंड पर भी पड़ सकता है। प्रदेश में हाशिये पर चल रहे दोनों राजनीतिक दल राजद और जदयू के बीच तालमेल से दोनों पार्टियों को पुनर्जीवन मिल सकता है। फिलहाल राज्य विधानसभा में राजद के पास एक सीट है तो जदयू शून्य पर है। दोनों दलों का जनाधार खिसकने के पीछे बड़ा कारण प्रदेश में नेतृत्व की कमी को माना जाता है। पूर्व में दोनों दलों की विधानसभा में बेहतर मौजूदगी रही है। राजद और जदयू के पास आधा दर्जन विधायक थे। बदली राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों दलों के नेता तालमेल को लेकर आशान्वित भी हैं।

झारखंड की राजनीति बिहार से अलग नहीं

पूर्व मंत्री राधाकृष्ण किशोर के मुताबिक इसकी संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। बिहार में दोनों दल भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए साथ आए हैं। झारखंड की राजनीतिक परिस्थिति भी बिहार से अलग नहीं है, लिहाजा इस दिशा में प्रयास करने पर सफलता मिल सकती है।दरअसल बिहार से सटे लगभग दो दर्जन सीटों पर जदयू और राजद का राजनीतिक समीकरण प्रभावी है, जो सीटों में बदल सकता है। ज्यादा ध्यान नहीं दे पाने के कारण दोनों दलों का जनाधार समय के मुताबिक अन्य दलों में शिफ्ट हो जाता है। राजद ने हाल के दिनों में संगठन का पुनर्गठन किया है। पूर्व विधायक संजय सिंह यादव कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए हैं। इधर राज्यसभा में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो के जाने से भी इसकी संभावना बढ़ी है कि आने वाले दिनों में जदयू यहां विस्तार की कवायद तेज करेगा।

जदयू की नजर कुर्मी वोटों पर

बिहार में जदयू के आधार वोटरों में कुर्मी मतदाता हैं। झारखंड में काफी प्रयास के बाद भी कुर्मियों का झुकाव जदयू की तरफ नहीं हो पाया है। इसकी वजह से कई प्रभावी नेताओं ने दूसरे दलों की राह पकड़ी। राज्य में कुर्मी मतदाताओं का रूझान आजसू पार्टी की तरफ है। सुदेश कुमार महतो की इस समुदाय पर पकड़ को फिलहाल तोड़ पाना मुश्किल है। ऐसे में जदयू को जनाधार बढ़ाने के लिए गतिविधियां तेज करनी होगी। जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने हाल ही में नीतीश कुमार से मुलाकात कर झारखंड में सक्रियता तेज करने का आग्रह किया है। यह भी कोशिश है कि पुराने नेताओं को एकजुट कर फिर से दल में लाने की पहल की जाए।

Edited By: M Ekhlaque