जासं, रांची : आजादी का अमृत महोत्सव को ले पर्यटन, कला संस्कृति खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग की ओर से राज्य संग्रहालय में दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। राज्य स्तरीय संगोष्ठी का विषय पारंपरिक लोककला नृत्य संगीत पर केंद्रित संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां..रहा। जिसमें वक्ताओं ने प्रदेश की परंपरागत लोककला पर अपने विचार प्रकट किए। पद्मश्री मुकुंद नायक ने झारखंड की परंपरा, संस्कृति, लोकगीत एवं लोककला पर लोगों को नई जानकारियां दी। हालांकि उन्होंने इस बात पर चिता प्रकट की कि नई पीढ़ी का झुकाव अब कला संस्कृति व परंपरागत भाषा पर कम है। कई नृत्य गुरू इस दिशा में काम कर रहे हैं और अपने दलों में युवा कलाकारों को शामिल कर रहे हैं। इसे प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। श्री नायक ने कहा कि यहां की कला संस्कृति को विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में भी जोड़ना चाहिए। ऐसी व्यवस्था की जाए कि कला संस्कृति से जुड़े कलाकारों को शिक्षा प्राप्त करने के बाद आजीविका की भी प्राप्ति हो। सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिखी स्थानीय झलक :

इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति दी गई। जिसमें झार, खड़िया नृत्य सेवा समिति के सदस्यों ने खड़िया लोक नृत्य की प्रस्तुति देकर सबका मन मोह लिया। वहीं जीवन ज्योति केंद्र बेड़ो के कलाकारों ने उरांव नृत्य आदिवासी छऊ नृत्य दल सोनाहातू ने छऊ नृत्य पेश किया। लोक कल्याण संस्थान रांची ने झूमर नृत्य एवं सुषमा नाग दल गुमला ने कड़सा नृत्य की प्रस्तुति की। झार कला दलों को डा शरफउद्दीन ने सम्मानित किया जबकि डा कमल बोस ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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