जागरण संवाददाता, रांची : निमोनिया सास से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, फेफड़े में इन्फेक्शन के कारण यह होता है। आमतौर पर बुखार या जुकाम होने के बाद निमोनिया का खतरा रहता है और 10-12 दिन में ठीक हो जाता है। लेकिन कई बार यह खतरनाक भी हो जाता है, खासकर 5 साल से छोटे बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में इसका प्रकोप ज्यादा है। दुनिया भर में निमोनिया के कारण 18 फीसद बच्चों की मौतें होती है। निमोनिया होने पर फेफड़ों में सूजन आ जाती है और कई बार पानी भी भर जाता है। बच्चों में आमतौर पर वायरल बीमारियों के कारण निमोनिया होता है, जबकि स्मोकिंग करनेवालों में बैक्टीरिया से। उक्त जानकारी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिताभ ने दी। उन्होंने बताया कि निमोनिया को 2 कैटिगरी में बाटा जा सकता है। एक कम्यूनिटी से होने वाला और दूसरा हॉस्पिटल से होनेवाला। क्यों होता है निमोनिया?

निमोनिया ज्यादातर बैक्टीरिया, वायरस या फंगल के हमले से होता है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफड़ों पर चोट लगने के अलावा खसरा और चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों के बाद भी इसकी आशका बढ़ जाती है। इधर, प्रदूषण की वजह से भी निमोनिया के मामले बढ़ रहे हैं। टीबी, एचआइवी पॉजिटिव, एड्स, अस्थमा, डायबीटीज, कैंसर और दिल के मरीजों को निमोनिया होने की आशका ज्यादा होती है। ------

क्या है लक्षण

- तेज बुखार

- खासी के साथ हरे या भूरे रंग का गाढ़ा बलगम आना, कभी-कभी हल्का-सा खून भी

- सास लेने में परेशानी

- दात किटकिटाना

- दिल की धड़कन का बढ़ना

- सास लेने की रफ्तार बढ़ना

- उलटी

- दस्त

- भूख न लगना

Posted By: Jagran

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